न्यायालय ने बिना स्टांप लगे मध्यस्थता समझौतों संबंधी आदेश पर पुनर्विचार को लेकर फैसला सुरक्षित रखा

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपनी पांच सदस्यीय पीठ के पूर्व के आदेश के संबंध में पुनर्विचार पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया था कि बिना स्टांप लगे मध्यस्थता समझौते कानून में लागू नहीं होते हैं.

Court Photo Credits: Twitter

नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर : उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपनी पांच सदस्यीय पीठ के पूर्व के आदेश के संबंध में पुनर्विचार पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कहा गया था कि बिना स्टांप लगे मध्यस्थता समझौते कानून में लागू नहीं होते हैं. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले बुधवार से डेरियस खंबाटा और श्याम दीवान सहित विभिन्न वरिष्ठ वकीलों की दलीलें सुनीं.

खंबाटा ने कहा कि स्टांप नहीं लगा होना एक खामी है जिसे ठीक करना संभव है और इससे ऐसी स्थिति पैदा होनी चाहिए जहां पक्षों के बीच मध्यस्थता समझौते का उद्देश्य विफल हो जाए. प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि पक्षों को मध्यस्थता के लिए भेजने का पूरा उद्देश्य ‘‘अधूरा है और उद्देश्य विफल हो गया.’’ पीठ ने कहा, ‘‘अगर मध्यस्थता समझौतों में खामियां ठीक होने की संभावना है तो आप इसे कैसे खारिज कर सकते हैं?’’ पीठ में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे.

इससे पहले 26 सितंबर को शीर्ष अदालत ने पांच-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करने का मुद्दा सात-न्यायाधीशों की पीठ को भेजा था, जिसमें कहा गया था कि बिना स्टांप लगे मध्यस्थता समझौते कानून में लागू नहीं किए जा सकते हैं. अप्रैल में पांच-न्यायाधीशों की पीठ ने 3:2 के बहुमत से सुनाए गए फैसले में कहा था कि जो समझौता स्टांप शुल्क के लिए योग्य है, उसमें मध्यस्थता खंड हो सकता है और जिस पर मुहर नहीं लगी है, उसे अनुबंध नहीं कहा जा सकता है. पीठ ने कहा कि बिना स्टांप लगा समझौता, जब उस पर स्टांप लगाने की आवश्यकता होती है, अनुबंध नहीं होने और कानून में प्रवर्तनीय नहीं होने के कारण, कानून में लागू नहीं हो सकता.

यह आदेश प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने एक याचिका पर विचार करते हुए दिया था. पीठ के समक्ष 25 अप्रैल को दिए गए फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत के बारे में मामला उठाया गया था. शीर्ष अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि उसका मानना है कि इस मामले को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के समक्ष रखा जाना चाहिए. पीठ ने कहा, ‘‘अब हो ये रहा है कि देश भर में मध्यस्थों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जहां उन्हें बताया जा रहा कि यह बिना स्टांप वाला समझौता है। इस मुद्दे को फिर से सुना जाए. हमें इसे हल करने की आवश्यकता है.’’

मामले में पेश हुए एक वकील ने कहा कि पांच न्यायाधीशों की पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है और यह निष्कर्ष कि अगर किसी समझौते पर स्टांप नहीं लगा है, तो वह अस्तित्वहीन है, सही नहीं हो सकता है. शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई को एक याचिका पर नोटिस जारी किया था और कहा था कि इसे खुली अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

England vs West Indies, T20 World Cup 2026 15th Match Pitch Report And Weather Update: इंग्लैंड बनाम वेस्ट इंडीज के बीच रोमांचक मुकाबले में बारिश बनेगी विलेन या फैंस उठाएंगे पुरे मैच का लुफ्त? यहां जानें पिच रिपोर्ट और मौसम का हाल

England vs West Indies, T20 World Cup 2026 15th Match Preview: इंग्लैंड बनाम वेस्ट इंडीज के बीच आज होगी कांटे की टक्कर, मैच से पहले जानिए हेड टू हेड रिकार्ड्स, मिनी बैटल, स्ट्रीमिंग समेत सभी डिटेल्स

कुर्ला स्टेशन पर टिकट क्लर्क की बहादुरी से महिला की बची जान, चलती ट्रेन की चपेट में आने से बचाया, सेंट्रल रेलवे के DRM ने VIDEO पोस्ट कर की तारीफ

Australia vs Ireland, T20 World Cup 2026 14th Match Scorecard: कोलंबो में ऑस्ट्रेलिया ने आयरलैंड को दिया 183 रनों का लक्ष्य, मार्कस स्टोइनिस ने खेली आतिशी पारी; यहां देखें पहली पारी का स्कोरकार्ड

\