देश की खबरें | न्यायालय ने डायरिया रोधी टीके के परीक्षण पर केंद्रवार आंकड़ों के अनुरोध वाली याचिका ठुकराई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने एंटी-डायरिया वैक्सीन रोटावैक के क्लीनिकल ट्रायल पर केंद्रवार डेटा मुहैया कराने जाने संबंधी याचिका खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि वह इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति द्वारा लिए गए फैसले में दखल नहीं दे सकता।

नयी दिल्ली, छह अगस्त उच्चतम न्यायालय ने एंटी-डायरिया वैक्सीन रोटावैक के क्लीनिकल ट्रायल पर केंद्रवार डेटा मुहैया कराने जाने संबंधी याचिका खारिज करते हुए मंगलवार को कहा कि वह इस मुद्दे पर एक विशेषज्ञ समिति द्वारा लिए गए फैसले में दखल नहीं दे सकता।

रोटावायरस वैक्सीन, रोटावैक का दावा है कि यह बच्चों को वायरस से बचाता है, जो उनके बीच गंभीर दस्त का प्रमुख कारण है।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया जिसमें केंद्र और अन्य को 6,799 शिशुओं पर किए गए रोटावैक के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल के परिणामों पर ‘‘अलग-अलग आंकड़े’’ सार्वजनिक करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

याचिका में कहा गया कि टीके की सुरक्षा और असर का आकलन करने के लिए दिल्ली, पुणे और वेल्लोर में तीन केंद्रों पर परीक्षण किए गए थे। इसमें दावा किया गया कि डेटा की जांच राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) द्वारा ‘‘सार्वजनिक हित में की जानी चाहिए थी, लेकिन इसके इर्द-गिर्द इतनी गोपनीयता है कि इसे इस शीर्ष निकाय को भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।’’

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि ‘‘हम विशेषज्ञ समिति के निर्णय में कैसे दखल दे सकते हैं?’’ पीठ ने कहा, ‘‘हम एनटीएजीआई के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’’

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि परीक्षण किए गए और डेटा एकत्र किया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस डेटा को जारी करने में क्या नुकसान है?’’

प्रतिवादियों में से एक की ओर से पेश हुए एक वकील ने दावा किया कि याचिका ‘‘अधूरी’’ है और याचिकाकर्ता ने इस मामले में जनहित याचिका के साथ शीर्ष अदालत का रुख करने से पहले उचित शोध नहीं किया है। इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

उच्चतम न्यायालय ने जुलाई 2016 में केंद्र और अन्य से जनहित याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें कहा गया था कि पृथक आंकड़े यह जानने के लिए महत्वपूर्ण हैं कि क्या टीका सभी क्षेत्रों में सुरक्षित है या कुछ समूह ‘‘टीके के प्रतिकूल प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील’’ हैं।

याचिका में केंद्र और अन्य को यह निर्देश देने का अनुरोध भी किया गया था कि वे याचिकाकर्ता को तीनों केंद्रों में किए गए रोटावैक टीके के क्लीनिकल ट्रायल के पूर्ण पृथक परिणाम उपलब्ध कराएं।

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