एजेंसी न्यूज

अदालत ने कच्चा तेल वायदा शून्य से नीचे निपटाने के एमसीएक्स के निर्णय पर रोक लगाने से किया इनकार

हालांकि उच्च न्यायालय ने एमसीएक्स के 21 अप्रैल के परिपत्र को चुनौती देने वाली एक निवेशक की याचिका पर सुनवाई करते हुए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), एमसीएक्स और एमसीएक्स क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने प्राधिकरणों से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने के लिए कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 24 जून को होगी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह आदेश 27 अप्रैल को पारित किया था, लेकिन इसे अदालत की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया।

अदालत ने कच्चा तेल वायदा शून्य से नीचे निपटाने के एमसीएक्स के निर्णय पर रोक लगाने से किया इनकार
जमात

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने कच्चे तेल के वायदा अनुबंध को 2,884 रुपये प्रति बैरल के नकारात्मक मूल्य पर निपटाने के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

हालांकि उच्च न्यायालय ने एमसीएक्स के 21 अप्रैल के परिपत्र को चुनौती देने वाली एक निवेशक की याचिका पर सुनवाई करते हुए बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), एमसीएक्स और एमसीएक्स क्लियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने प्राधिकरणों से चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब देने के लिए कहा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 24 जून को होगी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह आदेश 27 अप्रैल को पारित किया था, लेकिन इसे अदालत की वेबसाइट पर बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया।

याचिका में कहा गया है कि परिपत्र में कच्चे तेल वायदा अनुबंधों की गुजर चुकी तारीख के आधार पर दर तय की है, जो इस वर्ष 20 अप्रैल को 2,884 रुपये प्रति बैरल नकारात्मक में रही। यह अप्रत्याशित है और कानून तथा एमसीएक्स के नियमों के विपरीत है।

अदालत ने याचिका दायर करने वाली निवेशक एल्युमिनियम अलॉय एलएलपी को कच्चे तेल की नकारात्मक कीमत के कारण हुए नुकसान पर अंतरिम संरक्षण देने से इनकार कर दिया।

सेबी के वकील ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि परिपत्र किसी भी नियम अथवा कानून का उल्लंघन नहीं करता है। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज द्वारा नियत दर के आधार पर ही एमसीएक्स भी निपटारा करता है।

एमसीएक्स का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता कंपनी को उपयुक्त उपाय प्रतिभूति अनुबंध (विनियमन) अधिनियम के तहत अपील दायर करना चाहिये। उन्होंने इस याचिका को खारिज करने की मांग की।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 30, 2020 07:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).