नयी दिल्ली, 21 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप से सोमवार को इनकार कर दिया जिसके तहत सेंट स्टीफंस कॉलेज में समान विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) के अंकों पर विचार करने के अलावा अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश के लिए साक्षात्कार लेने की अनुमति दी गई है।
न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति पी.एस.नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि इस स्तर पर किसी भी हस्तक्षेप से और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी तथा प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनेगा।
पीठ ने कहा, ‘‘यह संज्ञान में लेते हुए कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है उसे उच्च न्यायालय ने लंबित रिट याचिका में अंतरिम आदेश के तौर पर दिया है; इस समय हम उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं देखते।’’
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से भी कहा कि वह मामले में फैसला तेजी से करे।
न्यायालय दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें 21 जुलाई के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है।
विश्वविद्यालय की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करते हुए तर्क दिया कि चयन प्रक्रिया अब भी चल रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए 50 प्रतिशत सीटों को अल्पसंख्यक छात्रों द्वारा भरा जाएगा। इसमें कोई परेशानी नहीं है। सवाल यह है कि 50 प्रतिशत आरक्षित सीटों को कैसे भरा जाएगा- अखिल भारतीय मेधा सूची से या सीईयूटी से।’’
मेहता ने कहा, ‘‘पिछले साल वे 50 प्रतिशत सीटों को साक्षात्कार के जरिये भरना चाहते थे; डीयू ने उन्हें निर्देश दिया कि इन 50 प्रतिशत सीटों में से 15 प्रतिशत को साक्षात्कार के जरिये भरें। साक्षात्कार हमेशा सापेक्षिक होता है। उच्च न्यायालय के आदेश से मेधावी छात्र बाहर रह जाएंगे।’’
सेंट स्टीफंस कॉलेज की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए.मरियारपुथम ने कहा कि यह अंतरिम आदेश है, छात्रों का चयन किया गया और उन्हें पहले ही कक्षाएं आवंटित कर दी गई हैं।
पीठ ने कहा कि इस स्तर पर वह अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप का इच्छुक नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘इस स्तर पर छात्रों के बीच और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।’’
मेहता ने तर्क दिया कि इस मामले में उच्च न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि अंतरिम आदेश गलत था और प्रत्येक प्रवेश मेधा सूची पर आधारित होना चाहिए; ऐसे में उन मेधावी छात्रों का क्या होगा जिनका चयन इस साक्षात्कार प्रक्रिया की वजह से नहीं होगा।
उन्होंने दावा किया कि साक्षात्कार के जरिये भरी गई सीटें एक तरह से ‘भुगतान वाली सीट’ हो गई हैं।
पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को आदेश पारित किया और प्रवेश प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ वास्तव में अब बहुत देर हो गई है। इससे और अनिश्चितता उत्पन्न होगी। एक बार उच्च न्यायालय में मामले का पूरी तरह से फैसला हो जाए तो छात्र जान पाएंगे कि स्थिति क्या है।’’
उच्च न्यायालय ने 21 जुलाई को कॉलेज को अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश के लिए सीईयूटी अंक पर विचार करने के साथ छात्रों का साक्षात्कार लेने की अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने जीसस ऐंड मेरी कॉलेज को भी अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित सीटों पर प्रवेश के लिए साक्षात्कार कराने की अनुमति दे दी।
उच्च न्यायालय का यह आदेश अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त दो महाविद्यालयों की अर्जी पर आया था जिसने दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद के 8 दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। आदेश में अल्पसंख्यक कोटे की सीटों के लिए सीयूईटी 2023 के अंकों को शत प्रतिशत प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया था।
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