देश की खबरें | अदालत ने भारतीय मूल के दुष्कर्म आरोपी के प्रत्यर्पण की कार्यवाही में दखल से इनकार किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंदन में दुष्कर्म के मामले के आरोपी भारतीय मूल के पूर्तगाली नागरिक के प्रत्यर्पण की कार्यवाही में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि महज नस्ल के आधार पर भेदभाव की निराधार आशंका को ब्रिटेन के सरकारी पदाधिकारियों पर अविश्वास करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता है।
नयी दिल्ली, 12 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंदन में दुष्कर्म के मामले के आरोपी भारतीय मूल के पूर्तगाली नागरिक के प्रत्यर्पण की कार्यवाही में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि महज नस्ल के आधार पर भेदभाव की निराधार आशंका को ब्रिटेन के सरकारी पदाधिकारियों पर अविश्वास करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता है।
न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने कहा कि याचिकाकर्ता ने दोनों देशों के बीच लागू प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद-नौ को लागू करने की मांग की थे लेकिन अपने साथ किसी संभावित भेदभाव को पुष्ट करने के लिये वह कोई साक्ष्य नहीं दे सका। अनुच्छेद-नौ नस्ल, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अभियोजन से राहत देने से संबंधित है।
न्यायाधीश ने कहा कि नस्लीय भेदभाव या मामले को नस्लीय रूप से प्रेरित होने के कारण याचिकाकर्ता को आरोपित किए जाने का कोई न्यायोचित सबूत नहीं है।
अदालत ने जांच के दौरान एकत्र किए गए सबूतों का पूरा खुलासा करने की याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि याचिकाकर्ता बेतुके आधार पर गिरफ्तारी से बच रहा है और वर्तमान याचिका ऐसा ही एक प्रयास है।
अदालत ने अपने 11 मई के आदेश में कहा, “भेदभाव या पूर्वाग्रह की एक मात्र निराधार आशंका को ब्रिटेन के सरकारी अधिकारियों पर अविश्वास करने का पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता है, इसलिए, संधि के अनुच्छेद-9 के तहत राहत का दावा करने का मामला नहीं बनता है। ऐसे में कार्यवाही में हस्तक्षेप करने और अतिरिक्त जानकारी या साक्ष्य के प्रकटीकरण के लिए ऐसा कोई आदेश पारित करने का कोई कारण प्रतीत नहीं होता है।”
याचिकाकर्ता ने मई 2017 में लंदन के एक पब में कथित तौर पर एक महिला के साथ बलात्कार किया और उसी साल जून में भारत वापस आया। उस पर ब्रिटेन के यौन अपराध अधिनियम,2003 की धारा 1(1) के तहत बलात्कार का आरोप लगाया गया और गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था।
सितंबर 2020 में, केंद्र सरकार ने ब्रिटेन से अनुरोध प्राप्त होने पर प्रत्यर्पण अधिनियम के तहत एक मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया और मार्च 2021 में याचिकाकर्ता के खिलाफ एक अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी की अदालत में प्रत्यर्पण कार्यवाही शुरू की गई।
याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया कि मौजूदा मामले में पेश किए गए सबूत या दी गई जानकारी प्रत्यर्पण अनुरोध को तय करने के लिए पर्याप्त नहीं है और उसके खिलाफ मामला झूठा और नस्लीय रूप से प्रेरित है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 12, 2022 08:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

