देश की खबरें | अदालत ने डीएमआसी-डैंपेल समझौते के विरूद्ध जनहित याचिका पर सुनवाई से किया इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की आनुषांगिक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लमिटेड (डैंपेल) और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के बीच के करार ‘सरकारी पैसे पर धोखाधड़ी’ है।

नयी दिल्ली, 18 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें आरोप लगाया गया है कि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की आनुषांगिक कंपनी दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लमिटेड (डैंपेल) और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) के बीच के करार ‘सरकारी पैसे पर धोखाधड़ी’ है।

इस समझौते के सिलसिले में मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने डीएमआरसी को डैंपल को 4600 करोड़ रूपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था।

न्यायमूर्ति मनमोहन की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि जनहित याचिका गलत धारणा पर आधारित , अध-पकी एवं बिना किसी आधार की है। वकील मनोहर लाल शर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इस समझौते के चलते दिल्ली मेट्रो ‘अनिल अंबानी के हाथों’ में चली जाएगी।

न्यायमूर्ति मनमोहन, न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने कहा कि यह अदालत तब इस याचिकाकर्ता के आरोपों का जनहित याचिका क्षेत्राधिकार में परीक्षण नहीं कर सकती है जब मध्यस्थ न्यायाधिकरण के फैसले की वैधता की जांच के वक्त उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय संबंधित करार(अनुबंध) को परख चुके हैं।

न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा, ‘‘ आप यह कहने के लिए किसी खबर के आधार पर नहीं आ सकते कि यह अनुबंध गड़बड़ है। यदि हम ऐसा करने लगते हैं तो अनुबंधों का क्या होगा? किसी के अनुसार किसी अनुबंध में कोई उपबंध सरकारी नीति के विरूद्ध हो सकता है और वह उसे चुनौती देने लगेगा... (तब)कौन निवेशक भारत आयेगा? यह जनहित याचिका मकसद नहीं है।’’

पीठ ने कहा कि कई बार जनहित याचिका बस आधा-अधूरी अर्जी देकर अच्छे उद्देश्य को धराशायी करने तथा उसे (याचिका को) खारिज कराने के लिए दायर की जाती है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कानून में उसके सामने उपलब्ध अन्य कानूनी रास्तों को आजमाने एवं कुछ शोध कर अदालत में आने को कहा ।

अदालत ने कहा, ‘‘ क्या आपने डीएमआरसी को लिखा है? क्या आपने अन्य को यह कहते हुए नोटिस दिया कि यह क्यों किया गया। ऐसा कुछ नहीं किया गया और आप सीधे उच्च न्यायालय आ गये। आपके पास वैकल्पिक उपाय हैं, उनका इस्तेमाल कीजिए। यह अधपकी एवं गलत धारणा पर आधारित है।’’

अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के आरोपों पर ‘पूर्ण सुनवाई’ की जरूरत है और यह जनहित याचिका क्षेत्राधिकार में नहीं की जा सकती है।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली और कहा कि यह याचिका धन बचाने एवं करार को अमान्य घोषित करवाने के लिए दायर की गयी है।

मध्यस्थ न्यायाधिकरण ने मई, 2017 में डैंपेल के पक्ष में फैसला दिया था जो सुरक्षा मुद्दों को लेकर एयरपोर्ट मेट्रो लाइन को चलाने से पीछे हट गया था।

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