देश की खबरें | एमटीपी अधिनियम की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से न्यायालय का इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गर्भ का चिकित्सकीय समापन (एमटीपी) अधिनियम की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि संसद ने महिलाओं के हित में कुछ प्रावधान बनाये हैं।

नयी दिल्ली, 25 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने गर्भ का चिकित्सकीय समापन (एमटीपी) अधिनियम की कुछ धाराओं को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि संसद ने महिलाओं के हित में कुछ प्रावधान बनाये हैं।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील को उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी।

पीठ ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय जाइए। वैसे भी, आप एमटीपी अधिनियम के प्रावधानों को इस आधार पर चुनौती दे रहे हैं कि इस प्रकार का संरक्षण महिलाओं को नहीं दिया जाना चाहिए।’’’’

याचिकाकर्ता संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने पीठ को बताया कि उन्होंने एमटीपी अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है।

उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य दलील यह है कि एक पंजीकृत चिकित्सक (आरएमपी) एक प्रशिक्षित स्त्री रोग विशेषज्ञ है और वह गर्भ समाप्त करने के लिए किसी महिला की मानसिक स्थिति का आकलन नहीं कर सकता/सकती है।

पीठ ने वकील से पूछा, "आपने किस अधिकार से याचिका दायर की है? आप किस प्रकार प्रभावित हैं?’’ इसपर वकील ने कहा कि यह एक जनहित याचिका (पीआईएल) है।

पीठ ने कहा, ‘‘‘‘कौन सी जनहित याचिका? एमटीपी अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने के लिए?" इसने आगे कहा, ‘‘‘‘संसद ने महिलाओं के हित में कुछ प्रावधान किए हैं...।’’’’

याचिकाकर्ता के वकील ने एमटीपी अधिनियम की धारा-तीन का हवाला दिया, जो इस मुद्दे से संबंधित है कि ‘रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स (आरएमपी)’ द्वारा गर्भ को कब समाप्त किया जा सकता है।

पीठ ने वकील से कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप इस याचिका को वापस ले लें।’’

इसके बाद वकील ने शीर्ष अदालत से उन्हें उच्च न्यायालय जाने की छूट देने का आग्रह किया।

पीठ ने कहा, ‘‘‘‘याचिकाकर्ता संबद्ध उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए याचिका वापस लेना चाहता है। याचिका को वापस लिया हुआ मानकर खारिज किया जाता है।"

शीर्ष अदालत ने पिछले साल जुलाई में दिये गये एक महत्वपूर्ण आदेश में, एमटीपी अधिनियम के दायरे का विस्तार करते हुए अविवाहित महिलाओं को भी शामिल किया था तथा 25-वर्षीय महिला को सहमति से बनाये गये संबंध से उत्पन्न 24 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी थी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\