देश की खबरें | डर्मेटोलॉजी कोर्स में दाखिले के लिए दिव्यांग उम्मीदवार की याचिका पर विचार से न्यायालय का इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने उस दिव्यांग उम्मीदवार की याचिका पर विचार करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसे पश्चिम बंगाल के एक चिकित्सा महाविद्यालय में त्वचा विज्ञान (डर्मेटोलॉजी) के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इस आधार पर प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया था कि ऐसे उम्मीदवारों के लिए राज्य के कोटे के तहत कोई आरक्षण नहीं है।

नयी दिल्ली, एक दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने उस दिव्यांग उम्मीदवार की याचिका पर विचार करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसे पश्चिम बंगाल के एक चिकित्सा महाविद्यालय में त्वचा विज्ञान (डर्मेटोलॉजी) के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में इस आधार पर प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया था कि ऐसे उम्मीदवारों के लिए राज्य के कोटे के तहत कोई आरक्षण नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि जब दाखिले की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है और साथ ही, उसका कोई भी निर्णय पहले से दाखिला ले चुके किसी अन्य छात्र को प्रभावित कर सकता है, ऐसी स्थिति में वह "अंतिम समय" में हस्तक्षेप नहीं करेगी।

पीठ ने याचिकाकर्ता से अगली बार तब आने को कहा जब वह इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगी।

छात्र ने याचिका में कहा था कि त्वचा विज्ञान के पीजी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए दिव्यांग व्यक्तियों को पश्चिम बंगाल में कोटा नहीं मिलता है, जबकि पीजी पाठ्यक्रमों में ऐसे छात्रों के लिए 27 सीट आरक्षित हैं।

याचिका में कहा गया था कि त्वचाविज्ञान पाठ्यक्रम में कोटा से इनकार करना "मनमाना और भेदभावपूर्ण" है।

राज्य सरकार के वकील ने कहा कि यदि कोई छात्र अखिल भारतीय योग्यता सूची में आता है तो दिव्यांग छात्रों के लिए कोटा उपलब्ध है।

पीजी दाखिले में राज्य कोटे के तहत दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

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