देश की खबरें | अदालत ने कम उपस्थिति के कारण रोके गए छात्र को परीक्षा देने की अनुमति देने से इनकार किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने कानून के एक छात्र को सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति देने से सोमवार को इनकार कर दिया। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय ने कक्षाओं में कम उपस्थिति को लेकर छात्र को परीक्षा देने से रोक दिया था।
नयी दिल्ली, दो जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने कानून के एक छात्र को सेमेस्टर परीक्षाओं में बैठने की अनुमति देने से सोमवार को इनकार कर दिया। इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय ने कक्षाओं में कम उपस्थिति को लेकर छात्र को परीक्षा देने से रोक दिया था।
इसके साथ ही अदालत ने कहा कि छात्रों को उनकी कक्षाओं में पेशे के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कानून के छात्र की याचिका पर दिल्ली विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया और अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया। लेकिन परीक्षा में शामिल नहीं होने देने संबंधी आदेश पर रोक लगाने के अनुरोध को खारिज कर दिया।
छात्र के पिता ने अदालत से अपने बेटे को अंतरिम राहत देने का आग्रह किया तो अदालत ने उनसे सवाल किया कि वह अपने बेटे के लिए "खड़े" क्यों हैं जिसने 50 प्रतिशत कक्षाओं में भी भाग नहीं लिया। अदालत ने कहा कि यह छात्र के लिए जीवन भर का सबक होगा।
अदालत ने कहा, ‘‘... वह कोई बच्चा नहीं है। वह 24 साल का है। इसी दौर में आपका सामना दुनिया से होता है। उसे समझाएं कि यह जीवन भर के लिए एक सबक होगा।’’
याचिकाकर्ता छात्र की कक्षाओं में उपस्थिति करीब 47 प्रतिशत रही थी। उसने दावा किया कि नवंबर में उसके दाहिने हाथ की हड्डी टूट जाने के कारण उसे पूर्ण आराम करने को कहा गया था और इसलिए वह कक्षाओं में शामिल नहीं हो सका।
अदालत ने कहा कि अगर पूर्ण आराम की अवधि को भी शामिल कर लिया जए तो भी वह 70 प्रतिशत की न्यूनतम उपस्थिति से कम होगा।
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