देश की खबरें | अदालत ने वन में कुएं की खुदाई को लेकर केंद्र, असम सरकार, ओआईएल को नोटिस जारी किया

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

गुवाहाटी, 30 सितम्बर गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र, असम सरकार, ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) और विभिन्न एजेंसियों को डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के भीतर सात कुएं खोदने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) को अनुमति प्रदान करने के एक मामले में नोटिस जारी किया। जिस स्थान पर कुएं खोदे जाने हैं वह बागजान कुएं के नजदीक है जहां हादसा हो गया था।

अधिवक्ता मृण्मय खतैनियार और पर्वतारोही अमर ज्योति डेका द्वारा संयुक्त रूप से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति मनीष चौधरी की खंडपीठ ने 14 प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवायी की तारीख 20 अक्टूबर तय की।

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पीठ ने इसके साथ ही एक अन्य वकील गौतम उजीर द्वारा दायर एक अन्य जनहित याचिका पर भी विचार किया, क्योंकि दोनों एक ही मुद्दे पर दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की वकील राखी सिरौथिया चौधरी ने कहा, ‘‘पिछली सुनवाई की तारीख पर अदालत ने प्रतिवादी पक्ष को जनहित याचिका पर जवाब देने को कहा था। हालांकि, ऑयल इंडिया के अलावा किसी ने भी जवाब नहीं दिया। इसलिए अदालत ने आज सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और दो सप्ताह का समय दिया।’’

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उन्होंने कहा कि हालांकि ओआईएल ने अदालत के पहले के निर्देश का जवाब दिया है, लेकिन याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक अतिरिक्त हलफनामे पर उसे नोटिस जारी किया गया है।

याचिकाकर्ताओं के एक अन्य अधिवक्ता देवजीत दास ने कहा कि पीठ ने साथ ही सभी प्रतिवादियों को ‘‘जैव विविधता प्रभाव आकलन अध्ययन’ के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन पर भी अपने जवाब देने को कहा है।

याचिकाकर्ताओं ने मामले में 14 को प्रतिवादी बनाया है जिसमें भारत सरकार, भारत सरकार के सचिव , असम सरकार, प्रधान सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल के प्रमुख और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) शामिल हैं।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड, राज्य वन्यजीव बोर्ड, ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल), महाप्रबंधक, उपायुक्त, आयुक्त और सचिव, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तिनसुकिया जिले के बागजान के उत्तर पश्चिम में डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के तहत आने वाले सात स्थानों पर हाइड्रोकार्बन के वास्ते जांच और ड्रिलिंग के लिए ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को पर्यावरणीय मंजूरी दी थी।

याचिका में कहा गया है कि यदि कंपनी को कुएं की खुदाई पर आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई तो वहां बागजान गैस कुएं जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे पूरे उद्यान को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

ओआईएल के बागजान कुएं के स्थल पर गत नौ जून के बाद से आग लगी हुई है। इस आग में दो दमकलकर्मियों की मौत हो गई है। बाद में बिजली का झटका लगने से एक इंजीनियर की भी मौत हो गई थी।

गत 19 मई को, कंपनी ने डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के भीतर कुएं की खुदाई की अनुमति मिलने के बारे में एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार में एक विज्ञापन प्रकाशित किया था। इस पर वन संरक्षण को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया जतायी गई थी।

अगले दिन, कंपनी ने एक आधिकारिक बयान के माध्यम से सूचित किया था कि डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के नीचे हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन के लिए उसने 2016 में आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के लिए वैधानिक निकायों से संपर्क किया था।

कंपनी ने दावा किया था कि वह उन्नत ड्रिलिंग तकनीक की मदद से जंगल की चहारदीवारी से करीब डेढ़ किलोमीटर भीतर सात कुएं खोदेगी।

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