देश की खबरें | न्यायालय ने कोविड-19 के दौरान सीमा पर किसानों के जमावड़े पर चिंता व्यक्त की,पूछा क्या वे इस संक्रमण से सुरक्षित हैं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के बीच तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर किसानों के जमावड़े पर चिंता व्यक्त करते हुये बृहस्पतिवार को केन्द्र से सवाल किया कि क्या ये किसान कोराना वायरस संक्रमण से सुरक्षित हैं। न्यायालय ने कहा कि कोरोना वायरस पर अंकुश पाने के लिये बने दिशा निर्देशों का पालन होना चाहिए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात जनवरी उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के बीच तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर किसानों के जमावड़े पर चिंता व्यक्त करते हुये बृहस्पतिवार को केन्द्र से सवाल किया कि क्या ये किसान कोराना वायरस संक्रमण से सुरक्षित हैं। न्यायालय ने कहा कि कोरोना वायरस पर अंकुश पाने के लिये बने दिशा निर्देशों का पालन होना चाहिए।

न्यायालय ने पिछले साल इस महामारी पर काबू पाने के लिये लागू हुये लाकडाउन के दौरान आनंद विहार बस अड्डे और निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने की घटना की सीबीआई जांच के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोरोना वायरस से किसानों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे,न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने सुनवाई के दौरान केन्द्र से कहा, ‘‘आपको हमें बताना चाहिए कि क्या हो रहा है। किसानों के आन्दोलन से भी वैसी ही समस्या पैदा होने जा रही है। हमें नही मालूम कि क्या किसान कोविड से सुरक्षित हैं। वही समस्या फिर पैदा होने जा रही है। ऐसा नहीं है कि सब कुछ बीत गया है।’’

न्यायालय ने केन्द्र की ओर से पेश सालिसीटर जनरल तुषार मेहता से जानना चाहा कि क्या विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान कोविड-19 से सुरक्षित हैं।

मेहता ने जवाब दिया, ‘‘निश्चित ही ऐसा नहीं है।’’

मेहता ने कहा कि वह दो सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट दाखिल करके बतायेंगे कि क्या किया गया है और क्या करने की जरूरत है।

यह याचिका अधिवक्ता सुप्रिय पंडिता ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र होने से नहीं रोक सकी और निजामुद्दीन मरकज का मुखिया मौलाना साद अभी तक गिरफ्तारी से बच रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ओम प्रकाश परिहार ने कहा कि मौलाना साद के बारे में केन्द्र ने कोई बयान नहीं दिया है।

इस पर पीठ ने परिहार से सवाल किया, ‘‘आपकी दिलचस्पी एक व्यक्ति में क्यों हैं? हम कोविड के मुद्दे पर हैं। आप विवाद क्यों चाहते हैं? हमारी दिलचस्पी है कि कोविड दिशानिर्देशों का पालन होना चाहिए।’’

पीठ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि कोविड संक्रमण फैले नहीं और इससे संबंधित दिशा निर्देशों का पालन हो।

पीठ ने कहा, ‘‘नोटिस जारी किया। इस बीच, प्रतिवादी अपने जवाबी हलफनामे दाखिल करेंगे।’’

केन्द्र सरकार ने पिछले साल पांच जून को न्यायालय से कहा था कि लॉकडाउन के दौरान आनंद विहार बस अड्डे पर बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने और तबलीगी जमानत के कार्यक्रम के आयोजन की घटनाओं की दिल्ली पुलिस जांच कर रही है और इसमें सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है।

इससे पहले, गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस द्वारा समय सीमा के भीतर जांच पूरी करने और अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने के प्रयासों के बारे में न्यायालय को विस्तार से अवगत कराया था।

गृह मंत्रालय ने कहा था कि दिल्ली के इलाकों में फर्जी खबरों और कतिपय गलत जानकारी की वजह से हजारों कामगार पिछले साल 28 मार्च को आनंद विहार बस अड्डे और गाजीपुर सीमा पर एकत्र हो गये थे।

मंत्रालय ने कहा था कि मौलाना साद के खिलाफ महामारी बीमारी कानून, आपदा प्रबंधन कानून और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान विदेशी नागरिक कानून के तहत भी आरोप जोड़े गये थे।

मंत्रालय ने कहा था कि मरकज के मामले से निबटने में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुयी थी और पुलिस ने 21 मार्च को ही तबलीगी जमात मुखयालय के पदाधिकारियों से संपर्क कर उन्हें कोविड-19 से उत्पन्न हालात से अवगत कराया गया था और विदेशियों को वापस उनके देश भेजने का निर्देश दिया था।

अनूप

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