नयी दिल्ली, 10 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने नोएडा के पूर्व मुख्य इंजीनियर यादव सिंह की सीबीआई की कथित गैरकानूनी हिरासत से रिहाई के लिये दायर याचिका का शुक्रवार को निपटारा कर दिया। इससे पहले शीर्ष अदालत को सूचित किया गया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यादव सिंह को बृहस्पतिवार को जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति आर. एफ. नरीमन, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति बी. आर. गवई की पीठ ने उच्च न्यायालय के जमानत आदेश के बारे में यादव सिंह के वकीलों के बयान दर्ज किए और कहा कि अब यह याचिका निरर्थक हो गई है, साथ ही मामले का निस्तारण कर दिया।
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उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सिंह को सीबीआई की कथित गैरकानूनी हिरासत से रिहाई के लिये दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे जमानत दे दी थी।
सीबीआई के अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय को बुधवार को बताया था कि इस मामले में आरोप पत्र दायर करने में देरी जानबूझकर नहीं की गई बल्कि ऐसा कोरोना वायरस महामारी के कारण अदालतों के बंद होने के कारण हुआ।
इस दलील को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि जांच एजेंसी का दावा तर्कसंगत नहीं लगता। साथ ही निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को विशेष अदालत द्वारा तय शर्तों को पूरा करने पर छोड़ दिया जाए।
इससे पहले शीर्ष अदालत ने आठ जुलाई को उच्च न्यायालय से कहा था कि सिंह की रिहाई की मांग वाली याचिका पर वह फैसला ले और उचित आदेश पारित करे।
यादव सिंह 11 फरवरी, 2020 से न्यायिक हिरासत में थे।
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