देश की खबरें | न्यायालय ने बिल्कीस बानो की पुनरीक्षण याचिका खारिज की;सजा माफी को चुनौती देने वाली याचिका लंबित
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने 13 मई के अपने एक फैसले का पुनरीक्षण करने का अनुरोध करने वाली सामूहिक बलात्कार पीड़िता बिल्कीस बानो की याचिका को खारिज कर दिया है।
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने 13 मई के अपने एक फैसले का पुनरीक्षण करने का अनुरोध करने वाली सामूहिक बलात्कार पीड़िता बिल्कीस बानो की याचिका को खारिज कर दिया है।
शीर्ष न्यायालय ने अपने उस फैसले में कहा था कि सामूहिक बलात्कार व हत्या मामले में एक दोषी द्वारा समय पूर्व रिहाई के लिए दायर अर्जी की पड़ताल के लिए गुजरात में एक ‘‘उपयुक्त सरकार’’ है।
बानो की अलग याचिका में 11 दोषियों की सजा गुजरात सरकार द्वारा माफ करने को चुनौती दी गई है, जो उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
बानो 2002 में गुजरात दंगों के दौरान सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थीं और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त बानो की उम्र 21 साल थी और वह पांच महीने की गर्भवती थीं।
शीर्ष न्यायालय ने 13 मई के अपने आदेश में राज्य सरकार को नौ जुलाई 1992 की अपनी नीति के संदर्भ में समय पूर्व रिहाई के लिए एक दोषी की याचिका पर विचार करने और दो महीने के अंदर फैसला करने के लिए कहा था। यह नीति दोषसिद्धि के समय लागू थी।
गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों की सजा माफ करते हुए उन्हें 15 अगस्त को रिहा कर दिया था।
प्रक्रिया के अनुसार, शीर्ष न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका पर फैसला संबंधित निर्णय सुनाने वाले न्यायाधीश अपने कक्ष में करते हैं।
कक्ष में विचार करने के लिए यह याचिका 13 दिसंबर को न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष आई थी।
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