देश की खबरें | न्यायालय ने पीसीए अधिनियम के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने पशु क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी जो धार्मिक उद्देश्यों के लिए किसी जानवर को मारने की अनुमति देता है।
नयी दिल्ली, सात जुलाई उच्चतम न्यायालय ने पशु क्रूरता निवारण (पीसीए) अधिनियम के उस प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी जो धार्मिक उद्देश्यों के लिए किसी जानवर को मारने की अनुमति देता है।
याचिका में तर्क दिया गया कि संविधान में अनुच्छेद 51-ए को शामिल करने के बाद, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 28 जारी नहीं रह सकती क्योंकि प्रत्येक नागरिक जीवित प्राणियों के प्रति दया रखने के संवैधानिक दायित्व के अधीन है।
इसमें धर्म के नाम पर पशुओं की कुर्बानी रोकने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने कहा कि 2017 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में 358 दिन की देरी हुई।
पीठ ने कहा, "विशेष अनुमति याचिका दायर करने में 358 दिन की देरी हुई है, जिसकी संतोषजनक ढंग से व्याख्या नहीं की गई है। इसलिए, उठाए गए कानून संबंधी सवाल पर कोई राय व्यक्त किए बिना, देरी के आधार पर विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।"
याचिकाकर्ता गोपेश्वर गौशाला समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन उपस्थित हुए।
शीर्ष अदालत इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसने 2017 में समिति की याचिका खारिज कर दी थी।
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