जरुरी जानकारी | न्यायालय का एचजेडएल विनिवेश मामले में सीबीआई को नियमित केस दर्ज करने का निर्देश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल) के वर्ष 2002 में हुए विनिवेश के दौरान बरती गई कथित अनियमितताओं के संदर्भ में नियमित मामला दर्ज करने का बृहस्पतिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया।
नयी दिल्ली, 18 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल) के वर्ष 2002 में हुए विनिवेश के दौरान बरती गई कथित अनियमितताओं के संदर्भ में नियमित मामला दर्ज करने का बृहस्पतिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की शुरुआती जांच के बाद सीबीआई के कई अफसरों की तरफ से की गई सिफारिशों एवं सुझावों को देखते हुए उसका यह मत है कि इस 'मिनी-रत्न' उपक्रम के 2002 में हुए विनिवेश की एक नियमित केस दर्ज कर जांच की जाए।
अटल बिहारी वाजपेयी की अगुआई वाली सरकार ने वर्ष 2002 में इस सार्वजनिक उपक्रम में अपनी नियंत्रक हिस्सेदारी रणनीतिक साझेदार स्टरलाइट को बेच दी थी। उस समय इस सौदे में कुछ अनियमितताएं बरते जाने के आरोप लगे थे जिसकी सीबीआई ने प्राथमिक जांच की थी। लेकिन बाद में वह जांच बंद कर दी गई थी।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्न की पीठ ने कहा कि एचजेडएल की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी के विनिवेश के संदर्भ में एक नियमित केस दर्ज करने के पर्याप्त आधार हैं। पीठ ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह न्यायालय को समय-समय पर इस मामले में हुई प्रगति से अवगत कराए।
केस दर्ज करने का आदेश देने के बावजूद शीर्ष अदालत ने एचजेडएल में सरकार की बची हुई 29.5 प्रतिशत हिस्सेदारी की खुले बाजार में बिक्री की अनुमति दे दी। उसने यह जरूर कहा कि यह बिक्री बाजार नियामक सेबी के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए की जाए और सबसे अच्छी कीमत पर शेयर बेचे जाएं।
सीबीआई ने विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर इस मामले की शुरुआती जांच के लिए 6 नवंबर, 2013 को एक मामला दर्ज किया था। लेकिन 6 मार्च, 2017 को नियमित केस दर्ज किए बगैर यह जांच बंद कर दी गई थी।
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