देश की खबरें | न्यायालय ने ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्र.श. आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं से मुद्दे तय किए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को दाखिले तथा नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केन्द्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं से तीन व्यापक मुद्दे तय किए हैं, जिन पर न्यायालय निर्णय लेगा।

नयी दिल्ली, आठ सितंबर उच्चतम न्यायालय ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लोगों को दाखिले तथा नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केन्द्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं से तीन व्यापक मुद्दे तय किए हैं, जिन पर न्यायालय निर्णय लेगा।

न्यायालय यह भी तय करेगा कि क्या संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम के जरिये राज्यों को इस प्रकार के विशेष प्रावधान करने की मंजूरी देकर संविधान की मूल संरचना के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया है अथवा नहीं।

प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने जिन तीन मुद्दों को निर्णय के लिए सामने रखा है, उनमें आरक्षण देने संबंधी निर्णय की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़े सभी पहलु ‘‘व्यापक तौर पर’’ समाहित हो गए हैं।

पहले मुद्दे के मसौदे में कहा गया है, ‘‘क्या 103वें संविधान संशोधन अधिनियम को संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन माना जा सकता है, जो सरकार को आर्थिक आधार पर आरक्षण जैसे विशेष प्रावधान करने की मंजूरी देता है।’’

दूसरा कानूनी प्रश्न यह है कि क्या यह कहा जा सकता है कि संविधान संशोधन ने राज्यों को निजी गैर-वित्तपोषित संस्थानों में दाखिले के संबंध में विशेष प्रावधान बनाने की अनुमति देकर मूलभूत संरचना का उल्लंघन किया है।

पीठ ने कहा कि तीसरा मुद्दा यह है कि ‘‘क्या 103वें संविधान संशोधन ने एसईबीसी, ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग को ईडब्ल्यूएस आरक्षण’’ के दायरे से बाहर रख कर संविधान के मूलभूत ढांचे का उल्लंघन किया है।

पीठ में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट, न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला भी शामिल हैं। पीठ ने कई वकीलों द्वारा तैयार किए गए मुद्दों पर गौर किया और इसके बाद वेणुगोपाल की ओर से तैयार किए गए तीन प्रश्नों को अहम प्रश्न मानने का निर्णय लिया। अब इन मुद्दों पर पीठ कोई फैसला सुनाएगी।

मामले पर सुनवाई 13 सितंबर को होगी।

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