देश की खबरें | अदालत ने सांसदों, विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित याचिका पर सुनवाई शुरू की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए सभी उच्च न्यायालयों को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर खुद शुरू की गयी एक याचिका के संबंध में मंगलवार को केंद्र, आप सरकार तथा अपनी रजिस्ट्री से जवाब मांगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, छह अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की निगरानी के लिए सभी उच्च न्यायालयों को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर खुद शुरू की गयी एक याचिका के संबंध में मंगलवार को केंद्र, आप सरकार तथा अपनी रजिस्ट्री से जवाब मांगा।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने उन्हें नोटिस जारी करके हलफनामा दायर करने को कहा, जिसमें उनसे उच्चतम न्यायालय के 16 सितंबर के निर्देश के अनुसार उठाए गए कदमों के बारे में बताने को कहा गया है।

यह भी पढ़े | उत्तर प्रदेश: डॉक्टरों ने युवक के पेट से सुई, 3 इंच की कील और पेचकस निकाली.

पीठ ने कहा, "आप (केंद्र, दिल्ली सरकार और उच्च न्यायालय रजिस्ट्री) अपने द्वारा किए गए कार्यों को रेखांकित करें।’’

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले ही अधीनस्थ न्यायालयों में चार न्यायाधीशों की नियुक्ति के आदेश दिए हैं।

यह भी पढ़े | Bihar Assembly Elections 2020: बीजेपी ने LJP को पीएम मोदी, अमित शाह की तस्वीर और नाम पर वोट मांगने से रोका- रिपोर्ट.

उच्चतम न्यायालय ने 16 सितंबर को सभी उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को एक उपयुक्त पीठ के समक्ष मौजूदा और पूर्व सांसदों/ विधायकों के खिलाफ सभी लंबित आपराधिक मामलों को तत्काल सूचीबद्ध करने को कहा, जिनमें रोक लगी हुयी है।

न्यायालय का यह निर्देश उस याचिका पर जारी किया गया था, जो 2016 में दायर की गई थी। इस याचिका में मौजूदा तथा पूर्व सांसदों/विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के निपटारे में काफी देरी होने का मुद्दा उठाया था।

उच्चतम न्यायालय ने यह गौर करने के बाद निर्देश जारी किया था कि मौजूदा और पूर्व के सांसदों/ विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में "कोई खास सुधार नहीं" हुआ है।

न्यायालय ने उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया था कि ऐसी स्थिति में जब रोक आवश्यक माना गया है, अदालत को बिना अनावश्यक स्थगन के मामले की रोजाना आधार पर सुनवाई करनी चाहिए और उसका तेजी से, संभव हो तो दो महीने में, निपटारा करना चाहिए।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

West Indies Women vs Australia Women T20I Stats: टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक-दूसरे के खिलाफ कुछ ऐसा रहा है वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला का प्रदर्शन, यहां देखें दोनों टीमों के आंकड़े

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match Pitch Report And Weather Update: किंग्सटाउन में वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला मुकाबले में मौसम बनेगा अहम फैक्टर या फैंस उठाएंगे पूरे मैच का लुफ्त? यहां जानें मौसम का हाल

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match Prediction: तीसरे मुकाबले को जीतकर सीरीज में क्लीन स्वीप करना चाहेगी ऑस्ट्रेलिया महिला, घरेलू सरजमीं पर पलटवार करने उतरेगी वेस्टइंडीज महिला, मैच से पहले जानें कौनसी टीम मार सकती है बाजी

West Indies Women vs Australia Women, 3rd T20I Match T20I Match Preview: कल वेस्टइंडीज महिला बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला के बीच खेला जाएगा अहम मुकाबला, मैच से पहले जानिए हेड टू हेड रिकॉर्ड्स, पिच रिपोर्ट समेत सभी डिटेल्स

\