देश की खबरें | न्यायालय ने दिव्यांग महिला को दूसरे अस्पताल में जाने को मजबूर करने केआरोपों की जांच करने को कहा

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नयी दिल्ली, 20 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने कोविड-19 से संक्रमित होने के संदेह में एक दिव्यांग महिला को एक अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करने संबंधी एक निजी अस्पताल के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने के दिल्ली सरकार को निर्देश दिये है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई करते हुए कहा कि चाणक्यपुरी में स्थित प्राइमस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ लगे आरोप ‘‘गंभीर प्रकृति’’ के हैं।

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न्यायालय ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता (मरीज के पिता) द्वारा चाणक्यपुरी में स्थित प्राइमस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के खिलाफ लगाये गये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और प्रतिवादी नम्बर एक (दिल्ली सरकार) को इन आरोपों की जांच करने के निर्देश दिये जाते हैं और यदि अस्पताल को किसी भी तरीके से अपने कर्तव्य से विमुख पाया जाता है, तो इस संबंध में उचित कार्रवाई करें।’’

न्यायाधीश ने शुक्रवार को पारित किये आदेश में कहा, ‘‘मैं, हालांकि, स्पष्ट कर सकता हूं कि इस अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।’’

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अदालत उस व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसकी पत्नी की 14 जून को कोविड-19 के कारण मौत हो गई थी। इस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी 34 वर्षीय बेटी 85 प्रतिशत दिव्यांग है और वह बुखार से पीड़ित थी और उसे सांस लेने में परेशानी हो रही थी जिसके बाद उसे 18 जून को प्राइमस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोविड-19 से उसके संक्रमित होने का संदेह था लेकिन अस्पताल ने बिस्तरों की अनुपलब्धता का बहाना बनाकर उसकी कोई जांच नहीं की।

याचिका में कहा गया है, ‘‘उसे लगभग अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया था। जबकि दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर कोविड-19 के मरीजों के लिए उक्त अस्पताल में बेड की उपलब्धता बताई जा रही थी।’’

इस व्यक्ति ने कहा कि अदालत में यह याचिका दायर करने के बाद, उन्होंने अपनी बेटी को साकेत के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया।

उन्होंने कहा कि उनकी और उनके पुत्र की अभी जांच होनी बाकी है।

दिल्ली सरकार के वकील ने कहा कि वह संबंधित प्राधिकरण से तत्काल इस व्यक्ति और उनके पुत्र की कोविड-19 के लिए जांच करने का अनुरोध करेंगे।

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