मेदिनीनगर (झारखंड), 29 अगस्त पलामू की पारिवारिक अदालत ने एक मामले में पति की तलाक की अर्जी पर सिफर्फ इस आधार पर मुहर लगा दी कि उसकी पत्नी अपना घर छोड़कर पिछले सात साल से अपने जीजा और पिता के यहां रह रही थी।
पति की याचिका पर तलाक का यह फैसला प्रधान एवं सत्र न्यायाधीश वंशीधर तिवारी ने शनिवार को सुनाया।
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उस मामले में पति बीरेन्द्र कुमार मेहता ने पारिवारिक अदालत में 26 जून 2018 को पत्नी सुनीता देवी के विरुद्ध तलाक के लिए वाद
दाखिल किया था जिसे अदालत ने सुनवाई एवं विवेचना के बाद स्वीकार कर लिया। दोनों के मध्य तलाक की आज स्वीकृति दे दी।
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पति ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि, उसकी पत्नी उसके साथ नहीं रहती, उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है और उसका व्यवहार क्रूरता पूर्ण है।
पति की ओर से अदालत में पैरवी कर रही अधिवक्ता सुधा पाण्डेय ने बताया कि, दोनों का विवाह 23 जून 2007 को हुआ था और उनकी दो बेटियां हैं।
पाण्डेय ने बताया कि शादी के बाद पत्नी अपने ससुराल से ज्यादा मायके, विशेष रूप से अपने बहनोई के घर रहा करती थी और याचिका में पति ने पत्नी पर बहनोई के साथ अनैतिक संबंध होने के भी आरोप लगाए थे।
अदालत ने मुख्य रूप से इस आधार पर पति की याचिका स्वीकार कर तलाक की मंजूरी दे दी कि पत्नी उसके साथ पिछले सात साल से नहीं रह रही है।
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