कोवर्किंग क्षेत्र पर अस्थायी हो सकता है कोरोना वायरस महामारी का असर: उद्योग जगत
हालांकि हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने वाले तथा आधुनिक कार्यस्थलों के लिये उत्प्रेरक के तौर पर देखे जाने वाले इस क्षेत्र के लिये चुनौतियां बनी हुई हैं, क्योंकि बड़े कारपोरेट अभी पाबंदियों को लेकर विस्तार को लेकर आशावान नहीं हैं।
बेंगलुरू, तीन मई कोरोना वायरस महामारी के कारण लोगों के बाहर निकलने में तेज गिरावट से प्रभावित को-वर्किंग उद्योग का मानना है कि यह असर अस्थायी हो सकता है और कुछ कारकों के अनुकूल होने के कारण इस क्षेत्र में फिर से मांग बढ़ सकती है।
हालांकि हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने वाले तथा आधुनिक कार्यस्थलों के लिये उत्प्रेरक के तौर पर देखे जाने वाले इस क्षेत्र के लिये चुनौतियां बनी हुई हैं, क्योंकि बड़े कारपोरेट अभी पाबंदियों को लेकर विस्तार को लेकर आशावान नहीं हैं।
अभी घर से काम करने वाले कई कर्मचारियों ने संकेत दिये हैं कि वे कोरोना वायरस महामारी के कारण उत्पन्न स्थिति के सामान्य होने के बाद भी घर से ही काम करते रहेंगे। ऐसे में को-वर्किंग स्पेस को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।
315 वर्क एवेन्यू के चेयरमैन मानस मेहरोत्रा ने कहा कि कोरोना वायरस से संबंधित चिंताओं ने को-वर्किंग क्षेत्रों में लोगों की आमद कम की है जबकि यह क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से तेज गति से बढ़ रहा था। उन्होंने कहा कि यह असर अस्थायी हो सकता है और तभी तक रह सकता है, जब तक सावधानियां बरतने की जरूरत रहेगी।
उनके अनुसार, कोई भी व्यवसाय अब अपने कर्मचारियों को पहले से कहीं अधिक लचीलापन प्रदान करने के लिये अपनी कार्य व्यवस्था पर पुनर्विचार करेगा। इससे को-वर्किंग क्षेत्र की मांग एक बार फिर से बढ़ेगी।
एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के निदेशक व प्रमुख (परामर्श) आशुतोष लिमये ने कहा कि को-वर्किंग क्षेत्र को अगली कुछ तिमाहियों में मांग में कमी देखने को मिल सकती है, लेकिन इस क्षेत्र में सबसे तेज वापसी भी देखने को मिलेगा। एक बार जब महामारी का दबाव कम हो जाता है, तब कई व्यवसाय इन लचीले कार्यक्षेत्रों को फिर से शुरू करने की कोशिश करेंगे।
एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी के अनुसार, शीर्ष शहरों में पारंपरिक कार्य स्थलों की तुलना में कोवर्किंग क्षेत्र से खर्च का बोझ 15 प्रतिशत कम होता है। पुणे जैसे शहरों में यह अंतर 33 प्रतिशत तक है। इस कारण स्टार्टअप और नये उद्यमों में को-वर्किंग स्पेस के प्रति विशेष झुकाव होता है।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 03, 2020 02:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

