देश की खबरें | कोरोना वायरसः बहने डाक या ई वाणिज्य कंपनियों के जरिए भेज रही राखियां

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस ने इस साल सभी त्यौहारों का स्वाद फीका कर दिया है। इसी कड़ी में रक्षाबंधन भी जुड़ गया है। पाबंदियों के इस दौर में बहनें दूसरे शहरों में रहने वाले अपने भाइयों को डाक और ई-वाणिज्य कंपनियों के जरिए राखियां भेज रही हैं।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 26 जुलाई कोरोना वायरस ने इस साल सभी त्यौहारों का स्वाद फीका कर दिया है। इसी कड़ी में रक्षाबंधन भी जुड़ गया है। पाबंदियों के इस दौर में बहनें दूसरे शहरों में रहने वाले अपने भाइयों को डाक और ई-वाणिज्य कंपनियों के जरिए राखियां भेज रही हैं।

दिल्ली निवासी निधि रावत को मीठा बेहद पसंद है और मुंबई में रहने वाले उनके भाई हर साल रक्षाबंधन पर 'बॉन्बे हल्वा' लेकर आते थे, लेकिन इस बार वह नहीं आएंगे।

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पम्मी सैनी ने अहमदाबाद में रहने वाले अपने भाई और भतीजे को राखी तथा एक पत्र भेजा है। उन्होंने कहा कि पाबंदियों ने यह एहसास कराया कि वह अपने भाई से कितना प्यार करती हैं।

रावत और सैनी की तरह ही कई महिलाएं कोरोना वायरस के कारण लागू यात्रा प्रतिबंध की वजह से अपने भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांध पाएंगी। कुछ महिलाओं ने तो हस्त निर्मित या मास्क के आकार की राखियां डाक या ई-वाणिज्य कंपनियों के जरिए भेजी हैं।

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रावत ने कहा, "वह मेरा छोटा भाई है और वह जानता है कि मुझे मीठा कितना पसंद है। वह हर बार मेरे लिए बॉम्बे हल्वा लेकर आता था।"

दिल्ली निवासी बैंकर ने कहा, "वह रोज अपने भाई से वीडियो कॉल पर बात करती हैं, लेकिन वह इस बात से दुखी हैं कि वह तीन अगस्त को रक्षा बंधन पर उन्हें गले नहीं लगा सकेंगी। "

वह दो बार डाकघर गई थी,मगर लंबी कतार देखकर लौट आईं, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा लोग डाक के जरिए राखियां भेजना चाहते हैं।

रावत ने बताया, " इसलिए, मैंने ई-वाणिज्य वेबसाइट के जरिए राखी भेजने का फैसला किया। मेरे पास इसके जरिए तोहफा भी भेजने का विकल्प था।"

बचपन में ही अपने पिता को खो देने वाली सैनी ने कहा कि उनका भाई उनसे आठ साल बढ़ा है और बचपन से ही उनका ध्यान रखता है।

दिल्ली में रहने वाली अध्यापिका ने कहा, " जब उन्हें अहमदाबाद में नौकरी मिल गई तो वह दिल्ली से चले गए। वह दिसंबर में पिछली बार आए थे। महामारी के कारण लगे लॉकडाउन ने यह एहसास कराया है कि मैं उनसे कितना प्यार करती हूं।"

निशा यादव का भाई पिछले 10 साल से रोहतक में रह रहा है और वह हर साल त्यौहार पर उसके लिए तोहफा जरूर लाता था।

यादव ने कहा, " मैंने डाक के जरिए उन्हें हाथ से बनी राखी भेजी है। मैं जानती हूं कि वह इसे पसंद करेंगे।"

मयूर विहार में रहने वाली रश्मि गुप्ता को इल्म है कि उनका भाई कोयंबटूर से दिल्ली नहीं आ सकेगा। इसलिए उन्होंने मास्क के आकार की राखी बनाई और 10 दिन पहले स्पीड पोस्ट के जरिए भेज दी ताकि यह समय पर उन्हें मिल जाए।

इस बार के रक्षाबंधन पर भाई भी मायूस हैं।

विकास त्रिपाठी ने कहा कि महामारी के कारण इलाहाबाद में रहने वाली बहन के यहां जाना मुमकिन नहीं है।

मीडियाकर्मी ने कहा, " बहन का परिवार वायरस से प्रभावित है और पृथक-वास में है। इसलिए मैं उन्हें वीडियो कॉल पर ही शुभकामनाएं दूंगा।"

नोएडा के रोहित मिश्रा ने कहा कि उनकी बहन ने उन्हें स्पीड पोस्ट के जरिए राखी भेजी है।

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