देश की खबरें | धार्मिक आधार पर मंदिर में नृत्य प्रदर्शन के लिए मना करने से केरल में विवाद
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भरतनाट्यम नृत्यांगना को केरल के एक प्रसिद्ध मंदिर में नृत्य प्रस्तुति की अनुमति देने से इनकार किये जाने से राज्य में एक विवाद खड़ा हो गया है।
कोच्चि/ नयी दिल्ली, 29 मार्च भरतनाट्यम नृत्यांगना को केरल के एक प्रसिद्ध मंदिर में नृत्य प्रस्तुति की अनुमति देने से इनकार किये जाने से राज्य में एक विवाद खड़ा हो गया है।
नृत्यांगना ने कहा कि वह किसी भी धर्म से संबंधित नहीं हैं।
त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा के कूडलमणिक्यम मंदिर में भरतनाट्यम करने के लिए मानसिया वीपी को अनुमति देने से इनकार करने का मुद्दा राज्य में सामाजिक-धार्मिक संगठनों के बीच एक बहस का विषय बन गया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थक सांस्कृतिक संगठन पुरोगमना कला साहित्य संघ (पुकासा) ने मानसिया को मंदिर में प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार करने के लिए कूडलमणिक्यम मंदिर के अधिकारियों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की।
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने हिंदू समुदाय को अलग-थलग करने के लिए इसे कम्युनिस्ट सरकार की एक ‘‘चाल’’ बताया।
कूडलमणिक्यम देवस्वोम केरल के पांच प्रमुख देवस्वोमों में से एक है।
विहिप ने एक बयान में आरोप लगाया कि यह घटना धर्मों के बीच दरार पैदा करके हिंदू समुदाय को अलग-थलग करने के लिए कम्युनिस्ट सरकार की एक ‘‘चाल’’ है।
विहिप की राज्य इकाई के प्रमुख विजी थम्पिक ने एक विज्ञप्ति में बताया, ‘‘ हमने मानसिया श्याम कृष्णन के लिए एक स्वागत समारोह करने और उन्हें प्रदर्शन करने के लिए एक मंच प्रदान करने का फैसला किया है। हम उन्हें विहिप के नियंत्रण वाले सभी 140 मंदिरों में प्रदर्शन का मौका देने के लिए भी तैयार हैं।’’
पुकासा द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘ यह कम्युनिस्ट पार्टी है जिसने सभी के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी। हम कामना करते हैं कि केरल के मंदिरों के दरवाजे सभी मनुष्यों के लिए खोले जाएं।’’
उसने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संबंध में अभी भी कई सामाजिक कुरीतियां प्रचलित हैं।
इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस घटना पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, ‘‘कला का कोई धर्म या जाति नहीं होती, लेकिन यहां कला को धर्म ने नकार दिया है।’’
थरूर ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि एक हिंदू और भारत के नागरिक के रूप में, वह मंदिर प्राधिकरण के फैसले से निराश हैं।
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