नयी दिल्ली, 22 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने न्यायपालिका के प्रति कथित आपत्तिजनक ट्वीट करने के कारण न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही के लिये कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रशांत भूषण को बुधवार नोटिस जारी किया। न्यायालय ने इस मामले में मदद के लिये अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल को भी नोटिस जारी किया है।
शीर्ष अदालत ने स्वत: शुरू की गयी न्यायालय की अवमानना कार्यवाही के इस मामले में ट्विटर इंडिया की बजाय ट्विटर इंक को भी पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने अमेरिका स्थित इस फर्म को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ से ट्विटर के वकील ने कहा कि अगर शीर्ष अदालत निर्देश देगी तो वह भूषण के कथित अवमाननाकारक ट्वीट को हटा देगी।
पीठ ने अटार्नी जनरल से इस मामले में सहयोग करने का अनुरोध करते हुये इसे पांच अगस्त को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध कर दिया।
प्रशांत भूषण द्वारा 27 और 29 जून को ट्विटर पर पोस्ट किये गये कथित अवमाननाकारक ट्वीट में शीर्ष अदालत की आलोचना की गयी थी।
ट्विटर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता साजन पुवैया ने पीठ से कहा कि ट्विटर इंडिया को इस मामले में गलती से पक्षकार बनाया गया है और इसकी जगह ट्विटर इंक होना चाहिए था।
पीठ ने इस मामले में सही पक्षकार ट्विटर इंडिया नहीं बल्कि ट्विटर इंक के होने संबंधी तथ्य का संज्ञान लेते हुये कंपनी को इस बारे में उचित आवेदन दायर करने की अनुमति दे दी।
पीठ ने कहा कि शुरू में अवमानना का यह मामला शीर्ष अदालत में प्रशासनिक पक्ष के समक्ष रखा गया था लेकिन इसे न्यायिक पक्ष में सूचीद्ध करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशांत भूषण लगातार न्यायपालिका से जुड़े मसले उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी।
भूषण ने भीमा-कोरेगांव मामले में आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिये थे।
इससे पहले भी उच्चतम न्यायालय ने नवंबर, 2009 में प्रशांत भूषण द्वारा एक पत्रिका को दिये गये साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ पूर्व और पीठासीन न्यायाधीशों के बारे में कथित रूप से आक्षेप लगाने के मामले में उन्हें अवमानना का नोटिस दिया था।
यह मामला शीर्ष अदालत में अभी तक लंबित है और न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में आखिरी बार मई, 2012 में सुनवाई हुयी थी और यह अब 24 जुलाई के लिये सूचीबद्ध है।
अनूप
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