देश की खबरें | कांग्रेस ने राज्यसभा से विपक्षी सदस्यों के निलंबन को ‘अलोकतांत्रिक’ बताया

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 21 सितंबर कांग्रेस ने सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों के निलंबन को ‘‘अलोकतांत्रिक’’ और ‘‘एकतरफा’’ करार दिया। निलंबित सदस्यों में कांग्रेस के भी तीन सदस्य शामिल हैं। पार्टी के नेता राहुल गांधी ने कहा कि पहले तो सदस्यों की आवाज दबाई गई और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया।

गांधी ने कहा कि ऐसा करके लोकतांत्रिक भारत को चुप कराने की कोशिश जारी है।

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उच्च सदन में रविवार को कृषि संबंधी दो विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान अप्रत्याशित हंगामा देखा गया था। इसके एक दिन बाद ही राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने उपसभापति हरिवंश के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को सोमवार को खारिज कर दिया और कहा कि प्रस्ताव उचित प्रारूप में नहीं था।

रविवार को हंगामे के दौरान उपसभापति के साथ ‘‘अमर्यादित आचरण’’ के लिए आज विपक्षी दलों के आठ सदस्यों को निलंबित कर दिया गया।

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राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘पहले तो आवाज दबायी गई, फिर सांसदों को निलंबित किया गया तथा कृषि संबंधी काले कानूनों के बारे में किसानों की चिंताओं पर आंखें मूंदकर कर लोकतांत्रिक भारत की आवाज को दबाने की कोशश जारी है।’’

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस ‘‘अन्तर्यामी सरकार’’ के अंतहीन घमंड ने पूरे देश को आर्थिक विपदा में झोंक दिया है।

लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी।

कांग्रेस नेताओं ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के आदेश के अनुसार काम कर रहे हैं।

चौधरी ने आरोप लगाया कि नवनिर्वाचित उपसभापति सरकार की शह पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘पीएमओ के आदेश पर उन्होंने विपक्षी दलों की आवाज को दबाने और उसे घोंटने का काम किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यही वजह थी कि राज्यसभा में हंगामा हुआ। अब किसानों की बदहाली से ध्यान हटाने के लिए वे राज्यसभा में हुए हंगामे को इस रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जैसे हमें पता ही नहीं कि संसद कैसे चलती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कैसे भागीदारी की जाती है।’’

उन्होंने कहा कि विपक्षी सदस्यों ने नियमों के अनुरूप मतदान की मांग की थी लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमें लगता है कि उपसभापति पक्षपात कर रहे हैं तो हमारे पास भी उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार है।’’

चौधरी ने कहा, ‘‘जिस अलोकतांत्रिक तरीके से सदस्यों का निलंबन हुआ है, हम उसकी निंदा करते हैं...यथास्थिति बहाल करने के लिए हम विरोध प्रदर्शन करेंगे।

सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया, ‘‘संसद में संविधान का और खेत खलिहान में किसान की आजीविका का गला घोंटा जा रहा है। मोदी जी के राजतंत्र को बचाने के लिए देश में और संसद में प्रजातंत्र को खत्म किया जा रहा है, उसकी हत्या की जा रही है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने देश की संसद को भी अपने ‘‘तानाशाही गुजरात मॉडल’’ में तब्दील कर दिया है और लोकतंत्र को ‘‘एकतंत्र’’ में बदल दिया है।

सुरजेवाला ने केंद्र से सवाल किया कि क्या 62 करोड़ किसानों के भविष्य का फैसला करने वाले काले कानूनों पर मत विभाजन मांगना पाप या असंसदीय है? क्या मार्शल बुलाकर सांसदों को धक्के मारकर निकालना संसदीय प्रणाली है।

निलंबित किए गए आठ सांसदों में कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के सदस्य शामिल हैं। उच्च सदन में कृषि संबंधी विधेयक को पारित किए जाने के दौरान ‘‘अमर्यादित व्यवहार’’ के कारण इन सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया है।

इससे पहले, सरकार ने आज तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओब्रायन, डोला सेन, माकपा के इलामरम करीम, के के रागेश आप के संजय सिंह, कांग्रेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा के निलंबन के लिए एक प्रस्ताव रखा।

विपक्ष के विरोध के बीच इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने निलंबित सदस्यों से सदन को छोड़कर जाने को कहा किंतु वे बाहर नहीं गये और आसन की व्यवस्था का विरोध करते रहे।

इन सदस्यों शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया है। नायडू ने कृषि संबंधी विधेयकों को पारित किये जाने के दौरान रविवार को इन सदस्यों के ‘‘अमर्यादित व्यवहार’’ की भर्त्सना की।

रविवार को राज्यसभा में किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (प्रोत्साहन एवं सुविधा) विधेयक 2020 तथा किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन का समझौता एवं कृषि सेवा विधेयक को विपक्ष के भारी विरोध के बीच पारित कर दिया गया। विपक्ष इन विधेयकों को प्रवर समिति में भेजने की मांग कर रहा था।

इन दोनों विधेयकों को लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है और अब इन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

सरकार के प्रमुख मंत्रियों ने रविवार को इन विधेयको को पारित किए जाने के दौरान राज्यसभा में इन विपक्षी सदस्यों के ‘‘अमर्यादित व्यवहार’’ को ‘‘बेहद शर्मनाक’’ और संसद के इतिहास पहले कभी नहीं होने वाला आचरण बताया था।

केंदीय मंत्री राजनाथ सिंह, प्रकाश जावड़ेकर, प्रहृलाद जोशी,पीयूष गोयल, थावरचंद गहलोत एवं मुख्तार अब्बास नकवी ने प्रेस वार्ता आयोजित कर विपक्ष के इस आचरण की निंदा की। सिंह ने दावा किया कि स्वस्थ्य लोकतंत्र में इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जाती है।

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