गुवाहाटी, 27 अप्रैल असम के कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने बुधवार को गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी की तत्काल रिहाई और बारपेटा में एक महिला पुलिस अधिकारी पर कथित हमले के मामले में उनके खिलाफ दर्ज मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ ट्वीट से जुड़े एक मामले में जमानत मिलने के बाद मेवानी को महिला पुलिस अधिकारी पर कथित हमले के मामले में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था ।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मेवानी की गिरफ्तारी ‘‘पूरी तरह से एक साजिश’’ थी और उस घटना पर संदेह व्यक्त किया जो कथित तौर पर उस समय हुई थी जब विधायक को उनके ट्वीट के लिए गुजरात से गिरफ्तार कर पुलिस हिरासत में असम के कोकराझार लाया जा रहा था ।
बरपेटा से कांग्रेस सांसद खालिक ने कहा, ‘‘मनगढ़ंत मामले में एक स्वतंत्र और न्यायिक जांच तुरंत शुरू की जानी चाहिए, क्योंकि पुलिस असम में स्वतंत्र नहीं है और राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। मेवानी को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।’’
मेवानी के खिलाफ बारपेटा में ही महिला पुलिस अधिकारी पर हमला करने का आरोप है ।
उन्होंने कहा कि मेवानी ने गुजरात में ट्वीट किया था । ‘‘इस बारे में असम में मामला क्यों दर्ज किया गया । जाहिर है कि असम के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री को खुश करना चाहते थे । इस तरह का व्यवहार करना एक मुख्यमंत्री के लिये शर्मनाक है ।’’
खालिक ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ मामला दर्ज कराने का प्रयास किया था, लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद असम पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया ।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में लोकतंत्र के लिये आदर नहीं है और अभिव्यक्ति का गला घोंटने के लिये तैयार है और ऐसा हम किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता मंजीत महंत ने बताया कि असम प्रदेश कांग्रेस समिति मेवानी की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदेश के सभी जिलों में बृहस्पतिवार को विरोध प्रदर्शन करेगी। प्रधानमंत्री का बृहस्पतिवार को असम के दौरे पर आने की संभावना है ।
गौरतलब है कि मेवानी निर्दलीय विधायक हैं जिन्हें कांग्रेस का समर्थन है ।
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