ताजा खबरें | ‘महिला आरक्षण अधिनियम’ जल्द अमल में लाने की कांग्रेस की मांग, भाजपा का विपक्षी दल पर राजनीति का आरोप
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस ने बुधवार को सरकार से मांग की कि प्रस्तावित ‘‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’’ को जाति जनगणना कराकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था के साथ जल्द अमल में लाया जाए, वहीं भाजपा ने कहा कि राज्यसभा और विधान परिषद में महिलाओं को आरक्षण देने जैसी मांग करके मुख्य विपक्षी पार्टी इस विधेयक पर राजनीति कर रही है।
नयी दिल्ली, 20 सितंबर कांग्रेस ने बुधवार को सरकार से मांग की कि प्रस्तावित ‘‘नारीशक्ति वंदन अधिनियम’’ को जाति जनगणना कराकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था के साथ जल्द अमल में लाया जाए, वहीं भाजपा ने कहा कि राज्यसभा और विधान परिषद में महिलाओं को आरक्षण देने जैसी मांग करके मुख्य विपक्षी पार्टी इस विधेयक पर राजनीति कर रही है।
कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने निचले सदन में नारीशक्ति वंदन विधेयक का समर्थन किया और सरकार से आग्रह किया कि जाति आधारित जनगणना कराकर विधेयक में एससी/एसटी के साथ ही ओबीसी की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए।
उन्होंने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित करने के प्रावधान वाले ‘संविधान (एक सौ अट्ठाईसवां संशोधन) विधेयक, 2023’ पर निचले सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए यह भी कहा कि कानून बनने के साथ इसे जल्द से जल्द लागू किया जाए, क्योंकि इसे लागू करने में देरी भारत की महिलाओं के साथ घोर नाइंसाफी होगी।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आधी आबादी को अधिकार देने का विधेयक लाने का श्रेय केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी को जाता है।
चर्चा में भाग लेते हुए दुबे ने कहा कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल इतने वर्षों तक यह विधेयक लेकर नहीं आए और प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा ने इसे लाने का नैतिक साहस दिखाया।
दुबे ने कहा, ‘‘आपने इसमें भी राजनीति की। जो जीता वही सिकंदर होता है। गोल मारने वाले को ही श्रेय दिया जाता है और आज यह गोल प्रधानमंत्री ने मारा है। यह प्रधानमंत्री और भाजपा का विधेयक है, आपको मानना पड़ेगा।’’
उन्होंने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि वह कभी राज्यसभा और विधान परिषद में महिलाओं को आरक्षण देने की मांग करके तो कभी ओबीसी को आरक्षण और ‘कोटा के तहत कोटा’ की बात करके इस विधेयक पर भी राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान सभा के समय से लेकर आज तक उच्च सदन और विधान परिषद में आरक्षण की बात नहीं की, लेकिन अब ‘गलत तरह का माहौल पैदा’ कर रही है।
उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव से पहले विधेयक को कानून बनाकर लागू करने की मांग भी राजनीति का हिस्सा है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 82 में स्पष्ट है कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन करने के बाद ही इस विधेयक को लागू किया जा सकेगा।
दुबे ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण देश में दो साल तक सब कुछ ठप रहा और ऐसे में जनगणना कैसे हो सकती थी।
उन्होंने कहा कि जनगणना संवैधानिक विषय है और गृहमंत्री अमित शाह हमेशा कहते हैं कि वह कोई असंवैधानिक काम नहीं करेंगे और जब जनगणना होगी तो सभी को बताया जाएगा और उसके बाद यह विधेयक लागू किया जाएगा।
दुबे ने चर्चा की शुरुआत करने वाली कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष जब बोल रही थीं तो लगा था कि वह राजनीति से ऊपर उठकर बात करेंगी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
दुबे ने कहा कि कांग्रेस के साथ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ में आज राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी जैसे दल हैं जो कभी नहीं चाहते कि महिला आरक्षण विधेयक आए।
सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘यह मेरी जिंदगी का बहुत मार्मिक क्षण है। स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन विधेयक मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी जी ही लेकर आए थे, जो राज्यसभा में सात वोटों से गिर गया था। बाद में पीवी नरसिंह राव जी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने उसे पारित करवाया। आज उसी का नतीजा है कि देश में 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘राजीव गांधी जी का सपना अभी तक आधा ही पूरा हुआ है। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही वह पूरा होगा।’’
द्रमुक की सदस्य कनिमोझी ने चर्चा में भाग लेते हुए विधेयक का समर्थन किया, लेकिन कहा कि जब तक विधेयक में से ‘परिसीमन के बाद’ शब्द नहीं हटाया जाएगा, इस कानून को जल्द लागू नहीं किया जा सकेगा और सालों तक यह लटका रहेगा।
उन्होंने सरकार पर 2024 से पहले इस विधेयक को लाकर राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
इससे पहले केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने लोकसभा में विधेयक को चर्चा एवं पारित कराने के लिए रखते हुए सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे इसे सर्वसम्मति से पारित करें।
‘नारीशक्ति वंदन विधेयक’ के कानून बन जाने के बाद 543 सदस्यों वाली लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या मौजूदा 82 से बढ़कर 181 हो जाएगी। राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीट आरक्षित हो जाएंगी।
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