देश की खबरें | कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क की दरें संप्रग सरकार के समय के बराबर करने की मांग की
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नयी दिल्ली, सात जनवरी कांग्रेस ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि देश की जनता को इस मुश्किल समय में राहत देने के लिए इन दोनों पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क को कम करके संप्रग सरकार के समय की दरों के बराबर किया जाना चाहिए।
पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार से एक फिर यह आग्रह किया कि तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त करने की किसानों की मांग भी स्वीकार की जानी चाहिए।
दूसरी तरफ, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेट्रोल-डीजल पर ‘लूट’ के कारण ही सरकार इन उत्पादों को जीएसटी के दायरे में नहीं ला रही है।
सोनिया ने एक बयान में कहा, ‘‘कोरोना की चौतरफ़ा मार से ध्वस्त अर्थव्यवस्था के बीच मोदी सरकार अपना ख़ज़ाना भरने के लिए आपदा को अवसर बनाने में लगी है। आज कच्चे तेल की क़ीमत 50.96 डॉलर प्रति बैरल है यानी मात्र 23.43 रुपये प्रति लीटर। इसके बावजूद डीजल 74.38 रुपये और पेट्रोल 84.20 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा रहा है। ये पिछले 73 साल में सबसे अधिक है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अंतराष्ट्रीय बाज़ार में क़ीमतें कम होने के बावजूद सरकार ने आम उपभोक्ता को इसका लाभ देने की बजाय उत्पाद शुल्क में बेतहाशा बढ़ोतरी करके मुनाफ़ा वसूली के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले साढ़े छह सालों में मोदी सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ा कर लगभग 19 लाख करोड़ आम जनता की जेब से वसूले हैं।’’
सोनिया के मुताबिक, गैस सिलेंडर के दामों को भी भाजपा सरकार ने बेतहाशा बढ़ा हर घर का बजट बिगाड़ा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सरकार से मांग करती हूं कि वह पेट्रोल व डीज़ल पर उत्पाद शुल्क की दरें संप्रग सरकार के समान करे और त्रस्त जनता को तत्काल राहत प्रदान करे। मैं सरकार से तीनों खेती कानूनों को भी तत्काल रद्द करके किसानों की सभी मांगें पूरी करने का आग्रह करती हूं।’’
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘पेट्रोल-डीज़ल के दामों में ग़ज़ब का ‘विकास’ हुआ है। मोदी सरकार ईंधन पर भारी कर वसूलकर जनता को लूट रही है। यही कारण है कि सरकार पेट्रोल-डीज़ल पर जीएसटी लागू करने को तैयार नहीं।’’
कांग्रेस महासचिव और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले साढ़े छह साल में इस सरकार ने उत्पाद शुल्क बढ़ाकर 19 लाख करोड़ रुपये कमाएं हैं। आज भी कच्चे तेल की कीमत 50.96 डॉलर प्रति बैरल है। यानी कच्चे तेल की प्रति लीटर कीमत 23.43 रुपये है। ऐसे में पेट्रोल 84.20 रुपये और डीजल 74.38 रुपये प्रति लीटर क्यों बेचा जा रहा है?’’
उन्होंने कहा कि मई 2014 के बाद मोदी सरकार ने डीज़ल पर उत्पाद शुल्क में 820 प्रतिशत व पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 258 प्रतिशत बढ़ाया।
सुरजेवाला ने दावा किया, ‘‘सस्ता पेट्रोल-डीजल के वादे कर सत्ता पर काबिज हुई मोदी सरकार यदि पिछले 6.5 वर्षों के दौरान खुद के द्वारा बढ़ाए उत्पाद शुल्क को ही वापस कर ले तो जनता का कल्याण हो जाएगा। ऐसा होने पर पेट्रोल की कीमत 60.42 रुपये प्रति लीटर व डीजल की कीमत 46.01 रुपये प्रति लीटर हो सकती है। पर ये करेंगे नहीं क्योंकि लूट का खेल चल रहा है।’’
गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा लगातार दूसरे दिन कीमतों में बढ़ोतरी करने के बाद राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल की कीमत बृहस्पतिवार को 84.20 रुपये प्रति लीटर हो गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है।
तेल विपणन कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार, बृहस्पतिवार को पेट्रोल की कीमत में 23 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 26 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 84.20 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 74.38 रुपये हो गई है। मुंबई में पेट्रोल 90.83 रुपये प्रति लीटर और डीजल 81.07 रुपये प्रति लीटर है।
हक
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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 07, 2021 05:15 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

