देश की खबरें | महासंघों के बीच टकराव खेलों के हित में नहीं : दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने खेल महासंघों में भीतरी कलह और विवादों पर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि ऐसा माहौल खेलों के लिये अच्छा नहीं है ।

नयी दिल्ली, दो अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने खेल महासंघों में भीतरी कलह और विवादों पर चिंता जताते हुए बुधवार को कहा कि ऐसा माहौल खेलों के लिये अच्छा नहीं है ।

मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) की अपील पर यह टिप्पणी की । बीएफआई ने उसकी चुनाव प्रक्रिया को लेकर एकल पीठ के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी ।

सुनवाई के दौरान महासंघ के सचिव और कोषाध्यक्ष की ओर से वकील ने कहा कि अपील विधिवत दायर नहीं की गई थी, क्योंकि इसे बीएफआई अध्यक्ष ने बिना किसी अधिकार के दायर किया गया था। अपीलकर्ता के वकील ने हालांकि कहा कि सचिव और कोषाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है।

पीठ ने पक्षों से विवाद का हल निकालने को कहा और यह भी कहा कि देश का हर खेल महासंघ मुकदमेबाजी में उलझा हुआ है और “आपसी विवाद” “खेल के हित” के आड़े आ रहे हैं।

अदालत ने कहा ,“हर खेल महासंघ में कोई न कोई विवाद है। आपका कार्य पूरे देश को प्रभावित करता है। इस तरह की अंदरूनी लड़ाई क्यों? इस तरह की चीजें आपको अंतरराष्ट्रीय निकाय द्वारा अयोग्य ठहराए जाने का रास्ता बनाती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक चार्टर द्वारा शासित होते हैं। चार्टर में कहा गया है कि (राष्ट्रीय) निकाय को स्वायत्त होना चाहिए। मुकदमेबाजी से स्वायत्तता से समझौता किया जा रहा है।’’

पीठ ने कहा ,‘‘ इस तरह की भीतरी लड़ाई समझ से परे है । हर खेल महासंघ किसी मुकदमे में उलझा है ।’’

मामले की अगली सुनवाई सात अप्रैल को होगी ।

अदालत ने कहा ,‘‘ अगर यह अंदरूनी कलह खत्म नहीं होता है तो हमें पता है कि आगे क्या करना है । इसलिये थम जाइये । खेलों के हित में हमें पता है कि क्या करना है ।’’

बीएफआई की याचिका में एकल न्यायाधीश के 19 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई है, जिन्होंने महासंघ के सात मार्च के फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें खेल निकाय के आगामी चुनावों में केवल अपने संबद्ध राज्य इकाइयों के निर्वाचित सदस्यों को ही अपने-अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी गई थी।

एकल न्यायाधीश का आदेश दिल्ली एमेच्योर मुक्केबाजी संघ की याचिका पर आया जिसमें कहा गया कि चुनाव की प्रक्रिया परिणामों की घोषणा के साथ जारी रहनी चाहिए, लेकिन यह याचिका पर अंतिम फैसले पर निर्भर होगा ।

निर्वाचन अधिकारी द्वारा स्वीकृत निर्वाचक मंडल की अंतिम सूची में दिल्ली एमेच्योर मुक्केबाजी संघ द्वारा भेजे गए दो नाम रोहित जैनेंद्र जैन और नीरज कांत भट्ट को शामिल नहीं किया गया था, क्योंकि यह पाया गया था कि वे सात मार्च के परिपत्र के आधार पर अयोग्य थे।

बीएफआई के चुनाव 28 मार्च को होने थे जो स्थगित कर दिए गए थे।

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