देश की खबरें | छात्रसंघ चुनाव कराएं, रैगिंग-रोधी समितियां गठित करें : उच्च न्यायालय ने बंगाल सरकार से कहा
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कोलकाता, पांच सितंबर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह तुरंत सभी विश्वविद्यालयों को छात्र संघ चुनाव कराने और जहां रैगिंग-रोधी समितियां गठित नहीं की गयी हो वहां इनका गठन करवायें।
अदालत ने यह निर्देश करीब महीने भर पहले एक छात्रावास में वरिष्ठ छात्रों द्वारा कथित रैगिंग के बाद यादवपुर विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम वर्ष के एक छात्र की मौत के बाद आया है। राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में कई वर्षों से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं।
मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार से एक हलफनामे में यह बताने को कहा कि क्या छात्र संघों के चुनाव समय पर कराने और रैगिंग-रोधी समितियों के गठन के संबंध में राज्य के विश्वविद्यालयों/संस्थानों को कोई निर्देश भेजा गया है।
अदालत ने निर्देश दिया, ‘‘अगर ऐसा नहीं किया गया है, तो हम राज्य सरकार को निर्देश देते हैं कि छात्र संघ चुनाव कराने के लिए सभी विश्वविद्यालयों/संस्थानों को तुरंत उचित निर्देश जारी करें और रैगिंग-रोधी समिति तथा रैगिंग-रोधी दस्ते का गठन करें।’’
खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि सभी औपचारिकताओं का पालन करने के बाद चुनाव कराए जाने चाहिए क्योंकि अदालत को सूचित किया गया था कि चुनाव कराने की अनुमति देने से पहले राज्य सरकार से अनुमोदन की आवश्यकता होती है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर गठित आर.के. राघवन समिति की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए, जिसमें सभी विश्वविद्यालयों में रैगिंग-रोधी समिति बनाने और छात्र संघों के चुनाव कराने की सिफारिश की गई थी, याचिकाकर्ता ने इसे राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में लागू करने की प्रार्थना की।
याचिकाकर्ता वकील सयान बनर्जी ने कहा कि समिति द्वारा प्रस्तुत की गई ऐसी रिपोर्ट और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा भेजे गए संचार के बावजूद, समिति की सिफारिशों को आज तक राज्य में लागू नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राज्य में विश्वविद्यालयों/संस्थानों में छात्र संघों के आखिरी चुनाव 2017 में हुए थे।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 19 सितंबर तय की।
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