ताजा खबरें | रेलवे के आंतरिक राजस्व में कमी आने पर राज्यसभा में जतायी गयी चिंता

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा में बुधवार को बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य प्रसन्ना आचार्य ने रेल परियोजनाओं के मामले में ओडिशा की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया वहीं रेलवे के आंतरिक राजस्व में कमी आने पर चिंता जतायी।

नयी दिल्ली, 16 मार्च राज्यसभा में बुधवार को बीजू जनता दल (बीजद) सदस्य प्रसन्ना आचार्य ने रेल परियोजनाओं के मामले में ओडिशा की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाया वहीं रेलवे के आंतरिक राजस्व में कमी आने पर चिंता जतायी।

आचार्य ने रेल मंत्रालय के कामकाज पर सदन में चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि रेलवे के मामले में उनके राज्य ओडिशा की लगातार अनदेखी की गयी है और प्रदेश के 30 जिलों में से छह जिले अब भी रेल नेटवर्क से दूर हैं। उन्होंने कहा कि ओडिशा में कई परियोजनाएं सालों से चल रही हैं और एक परियोजना तो 20 साल से चल रही है।

आचार्य ने ऐसी लंबित परियोजनाओं के जल्द क्रियान्वयन की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि रेलवे का अपने आंतरिक संसाधनों से राजस्व कम होता जा रहा है जिससे उसकी उधारी बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में रेलवे संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने भी चिंता जतायी है।

उन्होंने कहा कि रेलवे का योजना आकार हर साल बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा आम बजट में भी उसके आवंटन में लगातार वृद्धि हो रही है लेकिन संशोधित बजट में उसमें कमी कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी रेलवे आवंटित राशि खर्च नहीं कर पा रही है। उन्होंने ट्रेनों में यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ाए जाने की भी मांग की।

बीजद सदस्य ने कहा कि आजादी के पहले अंग्रेजी शासनकाल में देश में रेलवे नेटवर्क का विस्तार किया गया था लेकिन आजादी के बाद रेलवे नेटवर्क में अपेक्षित गति से विस्तार नहीं हो सका। उन्होंने मौजूदा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि 2014 में इस सरकार के सत्ता में आने के बाद रेल नेटवर्क का फिर से विस्तार हुआ है। उन्होंने किसान ट्रेन चलाए जाने के लिए भी केंद्र सरकार की प्रशंसा की।

उन्होंने रेलवे में स्वदेशी तकनीक अपनाने के लिए भी सरकार और रेल मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भले ही मूल रूप से राजस्थान के हैं लेकिन प्रशासनिक अधिकारी के रूप में उन्होंने काफी समय ओडिशा में बिताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य को उनसे काफी उम्मीदें हैं।

उच्च सदन में मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा अधूरी रही।

इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी को इस चर्चा की शुरूआत करने का मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि रेल मंत्रालय से पहले दो अन्य मंत्रालयों के कामकाज पर चर्चा हुयी जिनकी शुरूआत कांग्रेस और भाजपा के सदस्य ने की। उन्होंने कहा कि सदन की परिपाटी के अनुसार रेल मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की शुरूआत करने का मौका उनकी पार्टी को मिलना चाहिए था।

संसदीय कार्य राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने उनकी आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास 2012 से 2021 तक के आंकड़े हैं और विभिन्न चर्चाओं की शुरूआत करने के लिए पार्टी आधारित ऐसा कोई निश्चित क्रम या परिपाटी नहीं देखी गयी।

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