देश की खबरें | निर्माण मजदूरों का पंजीकरण युद्ध स्तर पर पूरा करना वक्त की मांग है : अदालत ने आप सरकार से कहा

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नयी दिल्ली, 17 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि यह वक्त की मांग है कि निर्माण मजदूरों का पंजीकरण ‘‘युद्ध स्तर पर’’ पूरा किया जाए ताकि कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर उन्हें सहायता मुहैया कराई जा सके।

न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने ‘‘जटिल’’ पंजीकरण फॉर्म, आवेदन भरने में प्राधिकरण की ओर से सहायता के अभाव और इसके लिए कोई विशिष्ट समयसीमा न होने को लेकर दिल्ली सरकार के बिल्डिंग एंड अदर कंसट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) बोर्ड से नाखुशी जताई।

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पीठ ने बोर्ड की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि उसके पास मजदूरों द्वारा आवेदन भरने और उसे अपलोड कराने के लिए सहायता मुहैया कराने का उपाय नहीं है। पीठ ने कहा कि यह करना उनका काम है, खासतौर से जब उन्होंने ऐसा जटिल फॉर्म बनाया है जो द्विभाषी भी नहीं है।

अदालत ने कहा, ‘‘अत: हम बोर्ड को निर्देश देते हैं कि वह यह सुनिश्चित करे कि पर्याप्त संख्या में डेस्क मुहैया कराए जाएं जहां मजदूर जा सकें और पंजीकरण के लिए फॉर्म भर सकें।’’

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उसने कहा कि इस उद्देश्य के लिए दिल्ली राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण (डीएसएलएसए) की सहायता ली जा सकती है।

उसने कहा कि उसके निर्देशों का अनुपालन करने वाला एक हलफनामा दो जुलाई को अगली सुनवाई से पहले दाखिल किया जाए।

पीठ ने बोर्ड के रुख को ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ बताया।

अदालत ने 16 जून के अपने आदेश में कहा, ‘‘अगर यही हालात रहते हैं तो निर्माण मजदूरों को पंजीकरण या अपने पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए अंतहीन इंतजार करना पड़ेगा। वक्त की मांग है कि इस प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि वैश्विक महामारी के मद्देनजर निर्माण मजदूरों को सहायता मुहैया कराई जा सके।’’

उसने बोर्ड और डीएसएलएसए को इसकी समीक्षा करने के लिए कहा कि पंजीकरण के नवीनीकरण वाले फॉर्म को कैसे आसान बनाया जा सकता है।

ये निर्देश सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की जनहित याचिका पर जारी किए गए हैं जिसमें बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू कानून के तहत यहां सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण कराने का अनुरोध किया गया ताकि लॉकडाउन के दौरान प्रत्येक मजदूर को हर महीने मुहैया कराए जा रहे 5,000 रुपये का राहत पैकेज मिल सके।

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