नयी दिल्ली, 14 दिसंबर केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने बृहस्पतिवार को कहा कि मोटा अनाज भूख से निजात दिलाने, अच्छे स्वास्थ्य, टिकाऊ खपत एवं उत्पादन और जलवायु जैसे प्रमुख टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के लिए कारगर हो सकता है।
मुंडा ने मोटे अनाज पर आयोजित दो दिवसीय आसियान-भारत श्री अन्न महोत्सव को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए अनाज की अहमियत बढ़ जाती है। मोटा अनाज प्राचीन अनाज है और यह पौष्टिक होने से शरीर को ताकत देता है। यह कृषि, जलवायु और खाद्य सुरक्षा के प्रति हमारे दृष्टिकोण में क्रांति लाने की शक्ति रखता है।''
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुंडा ने कहा कि मोटा अनाज यानी श्री अन्न न केवल एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का वाहक है, बल्कि एक स्थायी समाधान भी प्रदान करता है जो वर्तमान चिंताओं से मेल खाता है।
मुंडा ने कहा, ‘‘भूख से छुटकारा, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली, टिकाऊ खपत एवं उत्पादन और जलवायु कार्रवाई जैसे प्रमुख एसडीजी मुद्दों के समाधान में इस अनाज की क्षमता इसे विकासशील देशों के लिए अपरिहार्य संसाधन के रूप में स्थापित करती है।’’
उन्होंने कहा कि श्री अन्न के लिए न्यूनतम संसाधनों की जरूरत होती है और यह अधिकतम पोषण लाभ देने के लिए अलग परिवेश में पनपने की क्षमता रखता है।
आसियान-भारत श्री अन्न महोत्सव का आयोजन मोटे अनाज एवं इससे जुड़े उत्पादों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और एक बड़ा बाजार स्थापित करने के लिए किया गया है।
इस कार्यक्रम में कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी एवं शोभा करंदलाजे और कृषि सचिव मनोज आहूजा भी मौजूद थे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY