नयी दिल्ली, छह जून सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) अब हरित खनन विकल्पों का लक्ष्य लेकर चल रही है और प्रौद्योगिकी की मदद से भूमिगत खदानों से कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है।
सीआईएल के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ पारिस्थितिकी के लिए अनुकूल मानी जाने वाली भूमिगत खदानों से उत्पादन बढ़ाने के लिए नई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर कंपनी का ध्यान है। इसके अलावा कोयले के पर्यावरणानुकूल परिवहन के लिए कंपनी देशभर में 35 कोयला भंडारण केंद्र विकसित करने में भी लगी हुई है।
सीआईएल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कोयले एवं अन्य जीवाश्म ईंधनों के जलने से वैश्विक जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताएं गहरा रही हैं। जीवाश्म ईंधनों के इस्तेमाल से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘सीआईएल हरित खनन विकल्पों का भी लक्ष्य लेकर चल रही है और अपने भूमिगत उत्पादन को बढ़ाने की योजना बना रही है।’’
उन्होंने कहा कि सीआईएल पर्यावरण संरक्षण और अपने खनन क्षेत्रों के इर्दगिर्द एक हरित छतरी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 30.4 लाख से अधिक पौधे लगाए और अपने हरित क्षेत्र को बढ़ाकर 1,468.5 हेक्टेयर तक पहुंचा दिया।
घरेलू कोयला उत्पादन में 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखने वाली सीआईएल के प्रमुख अग्रवाल ने कहा कि अब तक 27 ईको पार्क और खनन पर्यटन परियोजनाएं विकसित की जा चुकी हैं।
उपग्रहों से मिली तस्वीरें ये संकेत देती हैं कि 76 प्रमुख खुली परियोजनाओं ने खनन हो चुके 62.5 प्रतिशत इलाके को अपना लिया है और सक्रिय खनन सिर्फ 37.5 प्रतिशत इलाके तक ही सीमित रह गया है। खनन के कारण खराब हुई प्रति एक हेक्टेयर भूमि के लिए सीआईएल ने लगभग दो हेक्टेयर जमीन में हरित आवरण विकसित किया है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY