जरुरी जानकारी | कोल इंडिया का गैर-बिजली क्षेत्रों को कोयला आबंटन पहली तिमाही में तीन गुना बढ़ा

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नयी दिल्ली, 29 जुलाई कोल इंडिया का बिजली क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों को ई-नीलामी योजना के जरिये ईंधन का आबंटन चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में तीन गुना बढ़कर 66.6 लाख टन रहा।

मांग में वृद्धि ऐसे समय हुई जब कोल इंडिया मांग में कमी के कारण खपत बढ़ाने के लिये गैर-बिजली क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है।

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ताजा सरकारी आंकड़े के अनुसार कोल इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष 2019-20 की अप्रैल-जून तिमाही में इन क्षेत्रों को 22 लाख टन कोयले का आबंटन किया था।

आंकड़े के अनुसार हालांकि, महारत्न कंपनी द्वारा योजना के तहत कोयले का आबंटन पिछले महीने में घटकर 5.6 लाख टन रहा जो इससे पूर्व वित्त वर्ष 2019-20 के जून महीने में 10 लाख टन था।

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पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में योजना के अंतर्गत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी का कोयला आबंटन घटकर 80.3 लाख टन रहा जो एक साल पहले 1.136 करोड़ टन तक पहुंच गया था।

योजना की शुरूआत 2015-16 में हुई। इसका मकसद निजी उपयोग वाले बिजली संयंत्रों समेत गैर-बिजली क्षेत्रों को कोयला सुचारू रूप से उपलब्ध कराना है।

कोल इंडिया इस समय कमजोर मांग की समस्या से जूझ रही है जबकि उसके पास कोयले क पर्याप्त भंडार मौजूद है।

कंपनी पर कोरोना वायरस महामारी और ‘लॉकडाउन’ का असर हुआ है। इससे कोयले की मांग और आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कंपनी ने इस महीने कहा था कि स्थिति जुलाई-सितंबर में भी अनिश्चित बनी रहेगी क्योंकि कुछ राज्य फिर से ‘लॉकडउाउन’ लगा रहे हैं।

कोल इंडिया का उत्पादन 1 से 16 जुलाई के दौरान 1.805 करोड़ टन रहा जो पिछले साल इस अवधि में 1.961 करोड़ टन था।

कंपनी के अनुसार कोयला का अधिक भंडार और कम उठाव के कारण कुछ बड़े खदानों में कोयला उत्पादन अभी भी प्रभावित है।

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