जरुरी जानकारी | कोल इंडिया ने सरकार से कोयले के परिवहन के लिये रेल शुल्क दरों में कमी की मांग की

नयी दिल्ली, 10 जून सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया ने कोयला ढुलाई का रेल भाड़ा कम करने का आग्रह किया है। इससे आयात में कमी लाने और आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कोल इंडिया कोयले की कमजोर मांग से जूझ रही है। बिजली क्षेत्र समेत उसके ज्यादातर ग्राहक पर्याप्त मात्रा में कोयला उठाने से बच रहे हैं।

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महारत्न कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘‘...कोल इंडिया ने ग्राहकों तक कोयला पहुंचाने के लिये सरकार से रेल भाड़े में रियायत देने पर विचार करने को कहा है। इससे आयातित कोयले की मांग कम करने में भी मदद मिलेगी।’’ कोविड-19 के कारण मांग में नरमी के बीच कोयला उठाव कम है। इसको देखते हुए कोल इंडिया ने सरकार से यह आग्रह किया है।

कोल इंडिया घरेलू कोयला आधारित बिजली संयंत्रों और गैर-बिजली क्षेत्र पर ध्यान दे रही हैं जो कोयले का आयात करते हैं। उन्होंने 2019-20 में करीब 15 करोड़ टन कोयले का आयात किया।

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सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी आयात की जगह घरेलू कोयले के उपयोग को बढ़ावा देने के लिये कदम उठा रही है।

इससे न केवल कोल इंडिया की आपूर्ति बढ़ेगी बल्कि आयात के कारण जो बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है, उस पर रोक लगेगी।

कोल इंडिया की कुल कोयला आपूर्ति में करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी बिजली क्षेत्र की है। मई के अंत तक उनके पास 5 करोड़ टन कोयला भंडार था जो 29 दिन की खपत क लिये पर्याप्त है।

कई बिजली संयंत्र कोल इंडिया से आपूर्ति लेने से बच रहे हैं। इससे कोयले का उठाव कम हो रहा है।

मई महीने में बिजली क्षेत्र ने कोल इंडिया और उसकी अनुषंगी इकाइयों से 3.015 करोड़ टन कोयला लिया जो पिछले साल इसी माह के 4.038 करोड़ टन के मुकाबले करीब 25 प्रतिशत कम है।

कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कोल इंडिया आपूर्ति के मामले में काम कर सकती है। हम अपने ग्राहकों के लिये सुविधा बढ़ा सकते हैं। जैसे नीलामी के लिये आरक्षित मूल्य में कमी और भाड़े में कमी को लेकर उनकी तरफ से रेलवे से संपर्क करना।’’

उसने कहा, ‘‘हम मांग को तो पूरा कर सकते हैं लेकिन मांग सृजित नहीं कर सकते। इसका कारण यह कई चीजों जैसे ‘लाजिस्टिक’, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव और सबसे महत्वपूर्ण ग्राहकों की कार्यशील पूंजी की उपलब्धता आदि पर निर्भर है।’’

कोल इंडिया आपूर्ति बढ़ाने के लिये सीमेंट, उर्वरक और इस्पात कंपनियों जैसे गैर-बिजली क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है।

कंपनी ने एक पोर्टल बनाया है जिसमें ग्राहक कोयले की मांग को लेकर पूरा ब्योरा दे सकते हैं और ईंधन हासिल कर सकते हैं।

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