देश की खबरें | लॉकडाउन में जरुरतमंदों की सेवा करने में नागरिक संगठनों को आ रही है दिक्कत: आईआईएमए सर्वेक्षण

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराने के लिए कार्य कर रहे नागरिक संगठनों और व्यक्तियों को वित्तीय चुनौतियों के चलते अपना कार्य जारी रखने में दिक्कत हो रही है। यह बात भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण में सामने आयी है।

अहमदाबाद, 25 जून कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंदों को भोजन मुहैया कराने के लिए कार्य कर रहे नागरिक संगठनों और व्यक्तियों को वित्तीय चुनौतियों के चलते अपना कार्य जारी रखने में दिक्कत हो रही है। यह बात भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद (आईआईएमए) द्वारा किये गए एक सर्वेक्षण में सामने आयी है।

आईआईएमए ने पिछले महीने ऐसी 113 इकाइयों का सर्वेक्षण किया। आईआईएमए ने अपने सर्वेक्षण के आधार पर कहा कि अधिकतर नागरिक संगठनों ने देखा कि प्रत्येक सप्ताह के बाद ऐसे लोगों की संख्या में वृद्धि हो रही है जिन्हें सहायता की जरुरत है।

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उसने कहा कि संगठनों और विभिन्न समूहों ने लॉकडाउन के चलते देशभर में भूख और भोजन की समस्या को दूर करने के लिए विभिन्न तरह से प्रयास शुरू किये।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि नागरिक संगठन और लोग विभिन्न तरह से राहत कार्य संचालित कर रहे हैं।

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इसमें कहा गया कि अधिकतर नागरिक संगठनों ने महसूस किया कि प्रत्येक सप्ताह के बाद ऐसे लोगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है जिन्हें सहायता की जरूरत है। जरुरतमंद लोगों की संख्या में वृद्धि होने और वित्तीय एवं साजोसामान की चुनौतियों के चलते इन संगठनों को अपना कार्य जारी रखने में दिक्कत हो रही है।

इसमें कहा गया है कि यद्यपि कई संगठनों ने संकट के समय जरुरतमंदों की सेवा का अपना कार्य जारी रखा लेकिन 36 प्रतिशत (सर्वेक्षण में शामिल 113 में से) को अपना कार्य बंद करना पड़ा।

सर्वेक्षण के अनुसार अपना कार्य बंद करने वालों में से 84 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें धन की कमी हो गई जबकि तीन प्रतिशत ने कहा कि उन्हें अपना कार्य जारी रखने की जरुरत महसूस नहीं हुई।

इसमें कहा गया कि नागरिक संगठनों के अनुसार जिन लोगों की मदद की गई उनमें अधिकतर संख्या दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों की थी।

अध्ययन में कहा गया कि ऐसे समय जब भोजन की देश स्तर पर नहीं बल्कि घरेलू स्तर पर कमी है, भूख कम करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को व्यापक बनाना जरूरी होगा।

अध्ययन में सरकार और नागरिक समाज के बीच नीति तैयार करने और जमीन पर उसे लागू करने में बेहतर समन्वय का सुझाव दिया गया है।

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