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देश की खबरें | असम में मूलनिवासी लोगों को शस्त्र लाइसेंस देने के फैसले का नागरिक मंच ने किया विरोध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम के नगांव जिले में एक नागरिक समूह ने ‘‘संवेदनशील और दूरदराज़’’ इलाकों में रहने वाले मूलनिवासी लोगों को सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस देने के राज्य सरकार के फैसले का मंगलवार को विरोध किया।

देश की खबरें | असम में मूलनिवासी लोगों को शस्त्र लाइसेंस देने के फैसले का नागरिक मंच ने किया विरोध

नगांव (असम), 29 जुलाई असम के नगांव जिले में एक नागरिक समूह ने ‘‘संवेदनशील और दूरदराज़’’ इलाकों में रहने वाले मूलनिवासी लोगों को सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस देने के राज्य सरकार के फैसले का मंगलवार को विरोध किया।

नगांव नागरिक सभा (एनएनएस) ने सोमवार शाम नगांव शहर में विरोध प्रदर्शन कर सरकार से यह निर्णय वापस लेने की मांग की।

गौरतलब है कि असम मंत्रिमंडल ने 28 मई को फैसला किया था कि राज्य सरकार संवेदनशील और दूरवर्ती क्षेत्रों में रह रहे मूलनिवासी लोगों शस्त्र लाइसेंस प्रदान करेगी ताकि उनके मन में सुरक्षा की भावना उत्पन्न हो।

प्रदर्शन के दौरान एनएनएस के सचिव बिरिंची बोरा ने कहा, ‘‘हमें सांप्रदायिक पिस्तौल नहीं चाहिए। हमें अपनी सूखी कृषि भूमि को बचाने के लिए सिंचाई चाहिए, हमें रोज़गार चाहिए, हमें ज़मीन के अधिकार चाहिए — जैसा कि सरकार बड़े कॉर्पोरेट घरानों को दे रही है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समाज के एक वर्ग को शस्त्र लाइसेंस देकर जनता का ध्यान प्रशासन की कथित विफलताओं से भटकाने की कोशिश कर रही है।

बोरा ने पूछा, ‘‘अगर कल को असम में मणिपुर जैसी स्थिति पैदा होती है, तो क्या बुलेटप्रूफ गाड़ियों में सुरक्षित बैठे मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक आम लोगों और बच्चों की ज़िम्मेदारी लेंगे?’’

उन्होंने असम की लोगों से अपील की कि वे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘‘सांप्रदायिक एजेंडे’’ से दूर रहें, जिसे वह ‘‘घोटालों को छिपाने का एक प्रयास’’ बता रहे हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कैबिनेट निर्णय के बाद आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि धुबरी, मोरीगांव, बारपेटा, नगांव और दक्षिण सालमारा-मनकाचर जैसे जिले संवेदनशील और दूरदराज़ क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं।

उन्होंने रूपाही, धींग और जानिया जैसे कुछ अन्य अल्पसंख्यक-बहुल क्षेत्रों का भी नाम लिया था।

मुख्यमंत्री शर्मा ने दावा किया था कि इन क्षेत्रों में रहने वाले मूलनिवासी लोग असम आंदोलन (1979-85) के समय से ही सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने 24 जुलाई को अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा था कि ‘‘मूलनिवासी लोगों का अस्तित्व केवल तभी संभव है जब उन्हें हथियार दिए जाएं।’’

उन्होंने 23 जुलाई को कहा था कि अगस्त से लोग एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेंगे।

उन्होंने यह भी कहा ‘‘हम संवेदनशील क्षेत्रों में मूलनिवासी समुदाय के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर रहे हैं।’’

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 29, 2025 01:38 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).