देश की खबरें | उप्र के कानपुर में क्रोमियमयुक्त कचरा: एनजीटी ने भूजल के शोधन संबंधी उपायों पर स्थिति रिपोर्ट मांगी

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नयी दिल्ली, 17 मई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के कानपुर में क्रोमियमयुक्त कचरे के कारण दूषित भूजल के शोधन संबंधी उपायों के संबंध में संबंधित अधिकारियों को एक और स्थिति रिपोर्ट दर्ज करने का निर्देश दिया है।

अधिकरण ने इस बात पर भी गौर किया कि प्रदूषित तत्वों को बहाये जाने पर रोक लगाकर कानपुर में गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता को सुधारने की जरूरत है।

अधिकरण कानपुर देहात के रनिया और कानपुर नगर के राखी मंडी में वैज्ञानिक तौर पर क्रोमियम कचरे के प्रबंधन और निपटान में अधिकारियों की कथित विफलता के मुद्दे पर सुनवाई कर रहा था।

न्यायमूर्ति ए. के. गोयल की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) और एक निरीक्षण समिति द्वारा दायर रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा, ‘‘हम पाते हैं कि जाजमऊ में सामान्य प्रवाह उपचार संयंत्र (सीईटीपी) के निर्माण कार्य में प्रगति संतोषजनक नहीं है और गंगा नदी और कानपुर नगर की पानी की गुणवत्ता जो अभी भी डी-श्रेणी में बनी हुई है और प्रदूषण के प्रवाह पर लगाम लगाकर इसमें सुधार करने की आवश्यकता है।’’

पीठ में न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल भी शमिल थे।

पीठ ने कहा कि अगली रिपोर्ट में भूजल में मौजूदा क्रोमियम स्तर का उल्लेख किया जाये। उसने कहा, ‘‘समय-समय पर स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया जाना चाहिए और सुरक्षित पेयजल के संदर्भ में उपचारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।’’

हरित अधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और कानपुर देहात के जिलाधिकारी की संयुक्त समिति को 31 अक्टूबर तक की स्थिति के बारे में 15 नवंबर तक एक और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 29 नवंबर तय की।

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