विदेश की खबरें | 'पवित्र अग्नि' पर इजरायली प्रतिबंध से ईसाई आक्रोशित

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. इज़रायल का कहना है कि वह एक और आपदा को रोकना चाहता है, क्योंकि पिछले साल भी एक भीड़ भरे यहूदी पवित्र स्थल पर भगदड़ मचने के कारण 45 लोग मारे गए थे। यद्यपि ईसाई नेताओं का कहना है कि सदियों से आयोजित समारोह में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है।

इज़रायल का कहना है कि वह एक और आपदा को रोकना चाहता है, क्योंकि पिछले साल भी एक भीड़ भरे यहूदी पवित्र स्थल पर भगदड़ मचने के कारण 45 लोग मारे गए थे। यद्यपि ईसाई नेताओं का कहना है कि सदियों से आयोजित समारोह में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है।

यरुशलम के पुराने शहर की घनी सीमाओं में अनिच्छा से ही सही, लेकिन यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों को अपने सबसे पवित्र स्थलों को साझा करना चाहिए, क्योंकि छोटे-मोटे परिवर्तन भी भविष्य में क्रोध का कारण बन सकते हैं।

शहर में इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल अल-अक्सा मस्जिद परिसर में पहले से ही फलस्तीनियों और इजरायली पुलिस के बीच एक सप्ताह तक जारी संघर्ष का माहौल दिख चुका है।

इजरायल-फिलिस्तीनी हिंसा की पृष्ठभूमि में, इस साल यहूदी, ईसाई और मुस्लिम छुट्टियां एक साथ पड़ी हैं। महामारी प्रतिबंध हटने के बाद पहली बार तीनों धर्मों के हजारों लोग अपने पवित्र स्थलों का दौरा करने के लिए प्राचीन शहर यरुशलम में जुट रहे हैं, जिससे तनाव बढ़ा है।

पूर्वी रूढ़िवादी ईसाइयों का मानना ​​​​है कि ईस्टर से पहले शनिवार को ‘चर्च ऑफ द होली सेपल्कर’ के अंदर एक चमत्कारी लौ दिखाई देती है। यह चर्च उस जगह पर बनी 12 वीं शताब्दी का एक विशाल गिरिजाघर है, जहां ईसाई मानते हैं कि यीशु को सूली पर चढ़ाया गया, उन्हें दफनाया गया और जहां वह पुनर्जीवित हो गये थे।

हर साल यूनान के धर्माचार्य मकबरे के पारंपरिक स्थल पर बने एक कक्ष में प्रवेश करते हैं और एक जली हुई लालटेन के साथ लौटते हैं। इस लालटेन की लौ से हजारों मोमबत्तियां एक-दूसरे के सहयोग से जलाई जाती हैं। (पवित्र) लौ को बाद में विशेष उड़ानों के जरिये अन्य देशों में रूढ़िवादी समुदायों तक भेजा जाता है।

इजरायल का कहना है कि इस साल वह सुरक्षा कानून लागू कर रहा है ताकि जगह और निकास द्वारों की संख्या के मद्देनजर भीड़ का आकार नियंत्रित किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि उत्तरी इजरायल के माउंट मेरोन में पिछले साल हुई भगदड़ की घटना की पुनरावृत्ति हो।

इजरायल के विदेश मंत्रालय के अंतरधार्मिक मामलों की निदेशक तानिया बर्ज रफेली ने कहा, ‘‘जब तक समस्या नहीं आती है, तब तक समस्या नहीं होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि चर्च ऑफ द होली सेपल्कर में कुछ घटित होता है तो हमें उसकी जिम्मेदारी तो लेनी होगी और हम चाहते हैं कि ऐसी समस्या को लौटना चाहते हैं।’’

रफेली ने कहा, ‘‘’यह कुल मिलाकर सुरक्षा का विषय है, कोई और मामला नहीं है।’’

चर्च के नेताओं ने सैद्धांतिक रूप से किसी भी प्रकार के प्रतिबंध को खारिज किया है और कहा कि ये प्रतिबंध धार्मिक आजादी के अधिकार का हनन है।

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