पटना, 10 अक्तूबर बिहार के कद्दावर नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का शनिवार को पटना में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया जहां उनके बेटे चिराग पासवान उन्हें मुखाग्नि देने के बाद अचेत हो गए ।
चिराग को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसे में समय में पितृशोक का सामना करना पड़ा है जब वे अपने राजनीतिक करियर के अहम पड़ाव पर खड़े हैं ।
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दिल्ली के एक अस्पताल में पिता रामविलास पासवान के अंतिम सांस लेने के बाद से 37 वर्षीय सांसद काफी टूट चुके हैं।
चिराग कर्तव्यनिष्ठ बेटे की तरह हमेशा अपने पिता की सेवा में लगे दिखाई दिए।
हाजीपुर के पास दीघा में जनार्दन घाट पर चिराग़ पासवान ने अपने पिता के अंतिम संस्कार से पहले चिता की परिक्रमा की और फिर मुखाग्नि दी। इसके बाद वह अचानक अचेत हो गए लेकिन उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें संभाल लिया जिससे वह गिरने से बच गए।
लोकसभा के दूसरी बाद सदस्य निर्वाचित 37 वर्षीय चिराग पासवान अपने पिता रामविलास के बीमार पड़ने, हृदय का आपरेशन होने से लेकर लगातार अस्पताल में उनकी देखरेख में लगे रहे । कोविड-19 के दौरान लॉकडालन लागू होने पर सोशल मीडिया में एक तस्वीर आई थी जिसमें वे अपने पिता के बाल बना रहे थे ।
चिराग ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ झंडा बुलंद करते हुए अकेले ही विधानसभा चुनाव में ताल ठोकने का आश्चर्यजनक निर्णय लिया था।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पासवान के आवास पर दिवंगत केंद्रीय मंत्री को श्रद्धांजलि देने आए थे तब भी चिराग अपने आंसुओं को नहीं रोक पाये थे ।
चिराग शनिवार की सुबह उस समय भी बहुत रोए, जब बचपन से ही उन्हें जानने वाले भाजपा सांसद और पूर्व मंत्री रामकृपाल यादव उनके पटना स्थित घर पहुंचे।
यादव की भी आंखें भर आईं और दोनों काफी देर तक एक दूसरे को पकड़कर खड़े रहे।
गंगा किनारे दिघा घाट पर पिता को मुखाग्नि देने के बाद चिराग बेहोश हो गए लेकिन उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें पकड़ा और वह जमीन पर गिरने से बच गए। तब पास खड़े उनके चचेरे भाइयों ने उनकी, अंतिम संस्कार की बाकी रस्म पूरी करने में मदद की ।
परिवार के एक करीबी सूत्र ने बताया, ‘‘ वह खतरे से बाहर हैं । गर्मी और आर्द्रता के साथ मानसिक तनाव के कारण उन्हें परेशानी हुई है । ’’
अंतिम संस्कार के बाद केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि पासवान के निधन से एक युग का अंत हो गया ।
सिंह ने कहा ‘‘पासवान दशकों लम्बे संसदीय अनुभव वाले अकेले ऐसे नेता थे । उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिहार से सभी केंद्रीय मंत्री उनके अंतिम संस्कार में मौजूद थे और इसके अलावा सभी राजनीतिक दल के नेता भी मौजूद थे ।’’
दीपक शफीक
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