विदेश की खबरें | चीन ने ताइवान की रक्षा का समर्थन करने वाले अमेरिकी सीनेट विधेयक की कड़ी आलोचना की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में संवाददाताओं से कहा कि चीन ने संबंधित विधेयक को लेकर अमेरिका से ‘गंभीर शिकायतें’ दर्ज कराई हैं। इस विधेयक के कानून में तब्दील होने के लिए अब भी अमेरिकी सदन और राष्ट्रपति जो बाइडन की मंजूरी की आवश्यकता है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में संवाददाताओं से कहा कि चीन ने संबंधित विधेयक को लेकर अमेरिका से ‘गंभीर शिकायतें’ दर्ज कराई हैं। इस विधेयक के कानून में तब्दील होने के लिए अब भी अमेरिकी सदन और राष्ट्रपति जो बाइडन की मंजूरी की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘वन-चाइना सिद्धांत चीन-अमेरिका के संबंधों का राजनीतिक आधार है। अगर बिल पर विचार-विमर्श जारी रहा, इसे मंजूरी दी गयी या इस पर हस्ताक्षर किया गया, तो यह चीन-अमेरिका की राजनीतिक नींव को हिलाकर रख देगा तथा ताइवान जलडमरूमध्य में दोनों देशों के बीच संबंधों तथा शांति और स्थिरता की दृष्टि से गंभीर परिणाम होंगे।’’

बुधवार को समिति द्वारा अनुमोदित ताइवान नीति अधिनियम 2022, ताइवान की ‘सुरक्षा और उसके आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन’ को मंजूरी देता है और इसके तहत अमेरिका, ताइवान की जवाबी हस्तक्षेप क्षमताओं को बढ़ाने में रक्षा फंड के तहत अरबों डॉलर प्रदान करेगा।

रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ विधेयक तैयार करने वाले अमेरिकी डेमोक्रेटिक सीनेटर बॉब मेनेंडेज ने कहा, ‘‘आज हम जिस विधेयक को मंजूरी दे रहे हैं, वह स्पष्ट करता है कि अमेरिका, चीन के साथ युद्ध नहीं चाहता है या तनाव नहीं बढ़ाना चाहता है। इसके ठीक विपरीत हम सावधानीपूर्वक तथा रणनीतिक दृष्टि से ताइवान के ऊपर अस्तित्व के खतरे को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।’’

विधेयक को समिति की मंजूरी ऐसे समय मिली है, जब पिछले महीने अमेरिकी सदन की अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइपे यात्रा के बाद से ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही अधिक था।

इस घटना ने चीन को ताइवान जलडमरूमध्य में मिसाइलें दागने और द्वीप के चारों ओर सैन्य अभ्यास के नाम पर बड़ी संख्या में जहाजों और युद्धक विमानों को जुटाने के लिए उकसाया।

एक बयान में, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह विधेयक पर ‘‘इस उम्मीद के साथ अमेरिकी सरकार के साथ सम्पर्क बनाए रखेगा कि यह कानून में तब्दील हो सकता है, जिससे अमेरिका और ताइवान के बीच दोस्ताना संबंध आगे बढ़ सकते हैं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है।’’

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