विश्व के कुछ देशों में विदेशी नागरिकों के लिए सरोगेसी सेवा यानी किराए की कोख को पूरी मान्यता है और यूक्रेन उनमें से एक है। यूक्रेन प्रशासन विदेशियों को यूक्रेन आकर सरोगेसी के माध्यम से संतान का सुख लेने की अनुमति देता है। लेकिन फिलहाल चिंता वाली बात यह है कि लंबे समय तक सीमाएं बंद रहने के कारण क्लीनिकों पर बोझ बढ़ेगा और अभिभावकों के लिए तनाव में वृद्धि होगी।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ल्यूडमिला डेनिसोवा ने कहा,“पहले से ही विभिन्न प्रजनन केंद्रों में लगभग 100 बच्चे अपने माता-पिता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। और अगर लॉकडाउन बढ़ाया जाता है तो यह संख्या सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों में हो जाएगी।”
देश के सबसे बड़े सरोगेट ऑपरेशन ‘बायोटेक्सकॉम’ द्वारा एक वीडियो जारी करने के बाद इस मुद्दे ने व्यापक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया जिसमें दर्जनों बच्चे होटल के दो बड़े कमरों में तंग पंक्तियों में रखे हुए दिखाये गये हैं।
वीडियो का उद्देश्य माता-पिता को इस संबंध में आश्वस्त करना था कि उनकी अनुपस्थिति में उनके बच्चों की अच्छी तरह देखभाल हो रही है।
डेनिसोवा ने कहा कि बायोटेक्सकॉम में 51 बच्चे हैं। इनमें से 15 बच्चे अपने उन अभिभावकों के पास हैं जो उन्हें लेने के लिए यूक्रेन तो आ गए लेकिन लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं जा सके। ये अभिभावक 12 देशों ... चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, बुल्गारिया, रोमानिया, ऑस्ट्रिया, मैक्सिको और पुर्तगाल के हैं।
यूक्रेन में कम से कम 22 मई तक पाबंदियां रहेंगी।
देश में आर्थिक संकट की वजह से कई महिलाएं सरोगेट मां बनती हैं और अपने परिवार को सहारा देती हैं।
यूक्रेन में कम से कम 50 क्लीनिक ऐसे हैं जहां सरोगेसी से संतान सुख लिया जा सकता है।
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