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देश की खबरें | बिल्डर को धमकी देने के मामले में 20 साल बाद छोटा राजन बरी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सीबीआई को झटका देते हुए गैंगस्टर छोटा राजन को एक बिल्डर को धमकाने के आरोप में दो दशक बाद एक विशेष अदालत ने बरी कर दिया।

देश की खबरें | बिल्डर को धमकी देने के मामले में 20 साल बाद छोटा राजन बरी

मुंबई, 11 मई सीबीआई को झटका देते हुए गैंगस्टर छोटा राजन को एक बिल्डर को धमकाने के आरोप में दो दशक बाद एक विशेष अदालत ने बरी कर दिया।

न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा है, क्योंकि गवाहों की गवाही के दौरान कुछ भी अभियोगात्मक नहीं मिला।

हालांकि, गैंगस्टर छोटा राजन मुंबई के क्राइम रिपोर्टर जे डे की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है और वह तिहाड़ जेल में ही रहेगा।

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) अदालत के विशेष न्यायाधीश एएम पाटिल ने बृहस्पतिवार को छोटा राजन को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष के सबसे विश्वसनीय गवाह को भी यकीन नहीं है कि बिल्डर को धमकाने के लिए उसे फोन करने वाला व्यक्ति वास्तव में छोटा राजन था।

मामले की जांच करने वाले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा कि रियल एस्टेट डेवलपर नंदकुमार हरचंदानी को छोटा राजन के नाम पर कई धमकियां मिली थीं, जिसमें उनसे कुछ व्यापारियों को बकाया राशि चुकाने के लिए कहा गया था।

अभियोजन पक्ष ने कहा कि हरचंदानी ने पैसे के भुगतान के मामले में आरोपी (छोटा राजन) की नाराजगी मोल ले ली थी, जिसने बिल्डर को सबक सिखाने की योजना बनाई। इसमें कहा गया है कि राजन ने अपने साथियों के माध्यम से कथित तौर पर हरचंदानी को निर्माण स्थल पर काम बंद करने के लिए कहा था।

सितम्बर 2004 में सात अज्ञात व्यक्तियों ने हरचंदानी के कार्यालय में प्रवेश किया और उनके लेखाकार पर गोली चलाई, लेकिन वह बाल-बाल बच गया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए दो प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही के दौरान वर्तमान आरोपी के खिलाफ कोई भी अभियोगात्मक बात रिकॉर्ड में नहीं आई।

न्यायाधीश ने कहा, "मौजूदा आरोपी के खिलाफ सबसे विश्वसनीय गवाह इरशाद शेख है, जिस धमकी के बारे में राजन का कथित फोन आया था। लेकिन जिरह के दौरान उसने स्वीकार किया कि उसे यकीन नहीं है कि फोन करने वाला व्यक्ति 'छोटा राजन' था या कोई और। यह इस गवाह द्वारा दी गयी महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है, जो मामले की जड़ तक जाती है।"

अदालत ने कहा, "संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध साबित करने में विफल रहा है।"

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(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2025 06:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).