देश की खबरें | छत्तीसगढ़ नान घोटाला: न्यायालय ईडी की याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार के लिए सहमत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई पर विचार करने के लिए सहमत हो गया जिसमें छत्तीसगढ़ के करोड़ों रुपये के नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाला से जुड़े धनशोधन मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को राज्य उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत दिए जाने को चुनौती दी गई है।

नयी दिल्ली, चार मार्च उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई पर विचार करने के लिए सहमत हो गया जिसमें छत्तीसगढ़ के करोड़ों रुपये के नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाला से जुड़े धनशोधन मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को राज्य उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत दिए जाने को चुनौती दी गई है।

ईडी की ओर से पेश सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जमानत दिए जाने के खिलाफ याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है कि मामले में आरोपी वरिष्ठ अधिकारियों के पक्ष में सबूत कथित तौर पर ‘गढ़े’ गए हैं।

विधि अधिकारी ने कहा, ‘‘यहां छत्तीसगढ़ से एक मामला है और एक संवैधानिक पदाधिकारी तथा जमानत दिए जाने को लेकर परेशान करने वाली स्थिति है तथा मैं (मामले का) स्थानांतरण की मांग कर रहा हूं। हर दिन सबूत तैयार किए जा रहे हैं।’’

मामले को तत्काल सूचीबद्ध किए जाने का अनुरोध करते हुए मेहता ने कहा कि ईडी की याचिका पर नोटिस जारी किया गया है और जवाब और प्रत्युत्तर भी दायर किए गए हैं। ईडी ने जमानत रद्द करने का अनुरोध किया है।

पीठ ने कहा, ‘‘ठीक है। (मामले की) संख्या दें।’’ पीठ में न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली भी शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने इससे पहले नान घोटाले से जुड़े धनशोधन में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला को अग्रिम जमानत दी थी।

ईडी ने 2019 में धनशोधन रोकथाम कानून के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करायी थी जो नागरिक आपूर्ति घोटाले के सिलसिले में छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो द्वारा दायर प्राथमिकी और आरोप पत्र पर आधारित थी।

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