देश की खबरें | छत्तीसगढ़ : आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को भूमि, वित्तीय सहायता देगी सरकार

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रायपुर, 22 मार्च छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा हाल ही में मंजूर की गई नई आत्मसमर्पण एवं पीड़ित पुनर्वास नीति के तहत माओवादी हिंसा के शिकार लोगों को भूमि और नक्सल रोधी अभियानों में सुरक्षा बलों की सहायता करते हुए मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

‘छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत-पुनर्वास नीति 2025’ का मकसद नक्सली हिंसा के पीड़ितों को अधिक मुआवजा, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और नौकरी के अवसर प्रदान करना है।

साथ ही, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास और नया जीवन शुरू करने के लिए कानूनी सहायता भी मिलेगी।

अधिकारी ने बताया कि राज्य में आत्मसमर्पण करने वाले अविवाहित या ऐसे नक्सली जिनके पति या पत्नी अब जीवित नहीं है, उन्हें आत्मसमर्पण करने के तीन वर्ष के भीतर विवाह के लिए एक लाख रुपए अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।

हाल ही में मंत्रिपरिषद द्वारा मंजूर की गई इस नीति में माओवादी हिंसा के पीड़ितों को ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि या शहरी क्षेत्रों में आवासीय भूमि देने का भी प्रावधान किया गया है।

उन्होंने बताया कि नई नीति का प्राथमिक उद्देश्य नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों की सहायता करना और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में फिर से शामिल करना है।

अधिकारियों ने कहा कि सरकार का मानना है कि नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सख्त कार्रवाई और पुनर्वास के बीच संतुलन जरूरी है।

नई नीति के तहत नक्सल रोधी अभियानों में पुलिस की विशेष सहायता करने वाले मुखबिरों की मृत्यु के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

अधिकारी ने नई नीति के मसौदे का हवाला देते हुए बताया कि ठीक इसी तरह नक्सली हिंसा में स्थायी विकलांगता के मामले में दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि नक्सलियों द्वारा हत्या किये जाने, गंभीर चोट पहुंचाने या फिर स्थायी विकलांगता की स्थिति में पीड़ित या उसके परिवार को शहरी क्षेत्रों में 1.5 हेक्टेयर कृषि भूमि या 1,742 वर्ग फुट आवासीय भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

अधिकारी ने बताया कि अगर भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा सकी तो ग्रामीण क्षेत्रों में पीड़ितों को चार लाख रुपये और शहरी क्षेत्रों में आठ लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि अगर पीड़ित का परिवार घटना के तीन साल के भीतर कृषि भूमि खरीदता है तो उसे अधिकतम दो एकड़ भूमि की खरीद पर स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क से पूरी छूट मिलेगी।

अधिकारी ने बताया कि नक्सली हिंसा में जान गंवाने के मामले में अगर परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं दी जा सकी तो 15 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी (पति/पत्नी-बच्चों को 10 लाख रुपये और माता-पिता को पांच लाख रुपये)।

उन्होंने बताया कि नई नीति में नक्सली हिंसा से पीड़ित लोगों के लिए भी पुनर्वास की व्यवस्था की गई है।

अधिकारी ने बताया कि राज्य में घटित नक्सली हिंसा में अगर अन्य राज्य के व्यक्ति/परिवार पीड़ित होते हैं, तो वे भी इस नीति के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे।

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