ताजा खबरें | चार्टर्ड एकाउंटेंट तीन अंतिम रास

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. माकपा सदस्य जॉन ब्रिटस ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा ‘‘लगभग सभी दल इसका विरोध कर रहे हैं फिर इसे लाने का औचित्य समझ में नहीं आता।’’ उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सभी पेशेवर लोगों की संस्थाओं की शक्ति छीनना चाहती है।

माकपा सदस्य जॉन ब्रिटस ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा ‘‘लगभग सभी दल इसका विरोध कर रहे हैं फिर इसे लाने का औचित्य समझ में नहीं आता।’’ उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह सभी पेशेवर लोगों की संस्थाओं की शक्ति छीनना चाहती है।

शिवसेना के अनिल देसाई ने कहा कि यह विधेयक राजकोष पर बोझ ही डालेगा। उन्होंने कहा ‘‘इसकी जरूरत नहीं थी। चार्टर्ड एकाउंटेंट के कदाचार की जांच के लिए और भी व्यवस्था है।’’

टीएमसी (एम) के सदस्य जी के वासन ने कहा ‘‘समन्वय समिति की भूमिका महत्वपूर्ण है जो मामले के हल में मददगार होगी। ’’

शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा ‘‘कॉरपोरेट सेक्टर में हुई जालसाजियों से यह धारणा बलवती हुई है कि जब तक चार्टर्ड एकाउंटेंट पर लगाम नहीं लगाई जाएगी, ऐसी जालसाजी पर रोक लगाना मुश्किल होगा। हालांकि सेबी आदि को देखें तो साफ हो जाता है कि कई बार नियामक तंत्र भी असफल साबित होता है।’’

उन्होंने बोर्ड के सदस्यों की संख्या पांच से बढ़ा कर छह करने और इसमें विशेषज्ञों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया।

आम आदमी पार्टी के नारायण दास गुप्ता ने कहा कि जो संशोधन किए जा रहे हैं उनकी जरूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि संस्थानों की स्वायत्तता बनी रहनी चाहिए और इनके कामकाज की नियमित रूप से समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने विधेयक को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की डॉ फौजिया खान ने कहा कि सरकार यह विधेयक ले आई लेकिन इसके लिए मानव संसाधन और अवसंरचना जरूरतों के बारे में उसने क्या विचार किया है, उसे बताना चाहिए।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस विधेयक से प्रतिशोध की राजनीति को बढ़ावा मिल सकता है।

कांग्रेस सदस्य नीरज डांगी ने आरोप लगाया कि सरकार चार्टर्ड एकाउंटेंट से ले कर हर किसी को अपने नियंत्रण में लेना चाहती है और यह विधेयक भी इसीलिए लाया गया है।

उन्होंने विधेयक का विरोध करते हुए कहा ‘‘विधेयक में प्रस्तावित अनुशासनात्मक समिति में मनोनयन की व्यवस्था इसके उद्देश्यों को पूरा नहीं करेगी।’’

भाजपा सदस्य अरुण सिंह ने कहा कि समय के साथ किसी भी कानून में संशोधन जरूरी होता है तथा सरकार इन संस्थानों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए ठोस तंत्र बनाना चाहती है और इससे संस्थाओं की स्वायत्तता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि चार्टर्ड एकाउंटेंट, संकर्म लेखापाल और कम्पनी सचिव से संबंधित व्यवस्था को मजबूत बनाना समय की मांग है।

भाकपा सदस्य विनय विश्वम ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि चार्टर्ड एकाउंटेंट उसके नियंत्रण में रहे, इसीलिए वह इसमें हस्तक्षेप कर रही है।

तेदेपा सदस्य कनकमेदला रवीन्द्र कुमार ने कहा ‘‘ऑडिट और एकाउंटिंग के लिए पूरी तरह दक्ष, विशेषज्ञों की जरूरत होती है, यह बात नहीं भूलना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि कई मुद्दों को देखते हुए इसमें बदलाव जरूरी है।

भाजपा से संबद्ध मनोनीत सदस्य डॉ नरेंद्र जाधव ने कहा कि विधेयक में संस्थानों के लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई समयबद्ध तरीके से करने की व्यवस्था है जो सराहनीय है।

आईयूएमएल सदस्य अब्दुल वहाब ने कहा कि विधेयक में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए बाहरी एजेंसियों को शामिल करना ठीक नहीं होगा।

भाजपा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने कहा ‘‘पिछले पांच साल में पांच लाख से अधिक कंपनियों का नाम कंपनी रजिस्ट्रार के पास से हटाना पड़ा । ज्यादातर कंपनियां या तो शेल कंपनियां थीं या वे जालसाजी में लिप्त पाई गईं। इसके पीछे कोई न कोई सीए ही शामिल रहा होगा।’’

उन्होंने कहा कि विभिन्न घोटालों में सीए की भूमिका को देखते हुए यह विधेयक लाना जरूरी हो गया था। उन्होंने कहा ‘‘उनकी परीक्षा, परिणाम, लाइसेंस किसी में सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।’’

सुशील मोदी ने कहा कि बदलाव हितों के टकराव को देखते हुए अनुशासनात्मक समिति में ही किया जा रहा है। इसका पीठासीन अधिकारी गैर सीए व्यक्ति होगा।

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