ताजा खबरें | चंद्रयान-3 को कोई ‘अवैज्ञानिक रंग’ नहीं दिया जाए, विक्रम साराभाई का नाम मिले: ए राजा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ए. राजा ने बृहस्पतिवार को सरकार से कहा कि चंद्रयान-3 मिशन को कोई ‘राजनीतिक रंग’ नहीं दिया जाए और इसका नामकरण महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर किया जाए।

नयी दिल्ली, 21 सितंबर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ए. राजा ने बृहस्पतिवार को सरकार से कहा कि चंद्रयान-3 मिशन को कोई ‘राजनीतिक रंग’ नहीं दिया जाए और इसका नामकरण महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर किया जाए।

राजा ने लोकसभा में ‘‘चंद्रयान-3 की सफलता और अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारे राष्ट्र की अन्य उपलब्धियां’’ विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए यह भी कहा कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक शक्ति का प्रभाव समाज के निचले स्तर तक पहुंचना चाहिए।

राजा ने कहा, ‘‘चंद्रयान-3 को अंतरिक्ष की सही कक्षा में पहुंचाकर पौराणिक मिथकों को समाप्त कर दिया गया है और यह द्रविड़ संस्कृति की जीत है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सरकार से अनुरोध है कि चंद्रयान को कोई वैज्ञानिक रंग नहीं दिया जाए। अमेरिका, रूस और चीन ने भी ऐसा नहीं किया। चंद्रयान-3 को विक्रम साराभाई का नाम दिया जाए।’’

द्रमुक सांसद ने कहा, ‘‘एक तरफ आप चंद्रयान को अंतरिक्ष में भेज रहे हैं, दूसरी तरफ आपका दिल और दिमाग कहीं और है। यह विरोधाभास है। एक तरफ प्रधानमंत्री चंद्रयान-3 की सफलता से अभिभूत हैं और दूसरी तरफ उन्हें विश्वकर्मा योजना शुरू करने का गौरव है।’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना लोगों को सुनार, जूते बनाने के काम जैसे परंपरागत कार्यों में ही शामिल रहने के लिए प्रोत्साहित करती है।

राजा ने यह भी कहा कि भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के साथ जो समानता हासिल की है, वह यह संदेश देगी कि देश अंतरिक्ष अनुसंधान में किसी से पीछे नहीं है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राजा की कुछ टिप्पणियों पर विरोध दर्ज कराते हुए व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सभी को अपनी आस्था के धर्म का अनुपालन करने का अधिकार देता है और कोई व्यक्ति उनकी धार्मिक आस्थाओं पर सवाल नहीं उठा सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन वह (राजा) हम पर बार-बार निशाना साध रहे हैं। हम सनातन को मानते हैं, हम हिंदू हैं और आपको हम पर बार-बार हमला करने का कोई अधिकार नहीं है।’’

पीठासीन सभापति राजेंद्र अग्रवाल ने राजा से अपने बयानों में सावधानी बरतने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘कई बार पौराणिक मान्यताएं और इतिहास मिले-जुले होते हैं। उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। हमारे देश में पुराणों के माध्यम से इतिहास बताने की परंपरा है।’’

राजा ने कहा कि हम चंद्रयान-3 को अंतरिक्ष में भेजने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को नकार नहीं सकते, लेकिन यह सामूहिक वैज्ञानिक एवं राजनीतिक उपलब्धि है।

उन्होंने द्रविड़ साहित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों साल पहले ही पंच तत्व से दुनिया बने होने की बात कही गयी है और जो दावे द्रविड़ विद्वानों ने हजारों साल पहले किये थे, वही बात न्यूटन ने 300 साल पहले कही।

राजा ने कहा कि तमिल विद्वान तिरुवल्लुवर ने करीब 2000 साल पहले कहा था कि पृथ्वी घूम रही है और तमिल साहित्य में वर्षों पहले चंद्रमा एवं अंतरिक्ष के अनुसंधान की बात कही जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-1, चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3, तीनों में ही उनके राज्य तमिलनाडु के वैज्ञानिकों का विशेष योगदान रहा है और इन वैज्ञानिकों ने साधारण सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई करके इस पायदान को छूआ है।

राजा ने यह भी कहा कि ये वैज्ञानिक संस्कृत और हिंदी नहीं जानते, केवल तमिल और अंग्रेजी जानते हैं।

चर्चा में भाग लेते हुए अन्य कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने भी चंद्रयान-3 की सफलता का श्रेय वैज्ञानिकों को दिया।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कोटा प्रभाकर रेड्डी ने इस मिशन की सफलता के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले ने कहा, ‘‘मेरी परवरिश वैज्ञानिक चेतना के साथ हुई है। राजनाथ सिंह का बहुत सम्मान है, लेकिन मुझे आज उनके भाषण से थोड़ी निराश हुई।’’

सुले के मुताबिक सिंह का कहना था कि सभी को देश की गौरवशाली परंपराओं पर बहुत गर्व है।

सुप्रिया ने कहा, ‘‘श्रद्धा होनी चाहिए, अंधश्रद्धा नहीं होनी चाहिए...सत्तापक्ष से वैज्ञानिक चेतना की बात करते हुए ऐसी बातें होती हैं जिससे हैरानी होती है।’’

समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता केवल वैज्ञानिक समुदायों की है और अन्य किसी को यह श्रेय देकर इसे कमजोर नहीं किया जाए।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के हसनैन मसूदी ने कहा कि देश में आज जो वैज्ञानिक सोच है, उसमें प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और उनके अन्य साथियों का योगदान है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चंद्रयान-3 की सफलता पर शाबासी में ही व्यस्त नहीं रहना चाहिए और देश में मौजूद अन्य जरूरी मुद्दों पर भी ध्यान देना चाहिए।

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