देश की खबरें | भूजल दोहन पर केंद्र का दिशानिर्देश पुरानी योजना पर नया चोला डालने जैसा : एनजीटी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. देश में भूजल के दोहन पर नियंत्रण और नियमन को लेकर जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश के बारे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि यह महज पुरानी योजना पर डाला गया नया चोला है, जिसमें केवल मामूली बदलाव और संशोधन किये गये हैं।

नयी दिल्ली, 26 फरवरी देश में भूजल के दोहन पर नियंत्रण और नियमन को लेकर जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देश के बारे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि यह महज पुरानी योजना पर डाला गया नया चोला है, जिसमें केवल मामूली बदलाव और संशोधन किये गये हैं।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2020 के दिशानिर्देश मोटे तौर पर इसके द्वारा बारबार और लगातार जारी निर्देशों को पूरा नहीं करते। पीठ ने कहा, ‘‘हमें दिशा-निर्देश 2020 में बहुत सुधार नहीं मिला है। वस्तुतः पुरानी योजना पर केवल नया चोला डाला गया है, जिसमें मामूली बदलाव और संशोधन किये गये हैं।’’

एनजीटी ने एक विचलन का जिक्र करते हुए कहा कि दिशानिर्देश में बताया गया है कि अति दोहन वाले इलाकों में नये बोतलबंद जल उद्योगों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं दी जाएगी, भले ही वे सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) श्रेणी से संबंधित हों। एनजीटी के मुताबिक 2015 के दिशानिर्देश में भूजल के अतिदोहन वाले किसी भी इलाके में जल का अधिक उपयोग करने वाले उद्योगों को कोई एनओसी नहीं देने की बात थी, भले ही वह एमएसएमई श्रेणी के हों। लेकिन नए दिशानिर्देश में पाबंदी केवल बोतलबंद पानी उद्योगों तक ही सीमित है।

हरित अधिकरण गाजियाबाद निवासी सुशील भट्ट द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें भूजल की अत्यधिक कमी वाले क्षेत्रों में भी मनमाने तरीके से भूजल दोहन का मुद्दा उठाया गया था। एनजीटी ने कहा, लगता है कि अधिक जल का इस्तेमाल करने वाले उद्योगों को पानी के संबंध में भारी छूट दी गई है, वह भी बिना किसी कारण के। एनजीटी ने कहा कि यह राहत देकर उसके आदेश की घोर अवहेलना की गई है। अधिकरण ने कहा कि गंभीर और अर्ध-गंभीर क्षेत्रों को अछूता छोड़ दिया गया है और किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

पीठ ने कहा कि यूपी भूजल विभाग द्वारा जारी अधिसूचना से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में लगभग हर जिले और कुछ जिलों में भूजल स्तर गिरकर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। इसी तरह दिल्ली में भूजल की स्थित को पहले से ही गंभीर बताया। अधिकरण ने ग्रेटर नोएडा स्थित मून बेवरेजेज लिमिटेड पर 1.85 करोड़ रुपये, मून बेवरेज लिमिटेड की साहिबाबाद इकाई पर 13.24 करोड़ रुपये और वरुण बेवरेजेज लिमिटेड की ग्रेटर नोएडा इकाई पर 9.71 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा भी लगाया।

एनजीटी ने एक संयुक्त समिति का भी गठन किया जिसमें पर्यावरण मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, सीजीडब्ल्यूए, यूपीजीडब्ल्यूडी और संबंधित जिलों के जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं। समिति दो महीने के भीतर भूजल स्तर बहाल करने की योजना तैयार करेगी, अगले छह महीनों में उसे क्रियान्वित करेगी और अनुपालन रिपोर्ट सौंपेगी।

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