देश की खबरें | वैवाहिक बलात्कार के अपराधीकरण पर रुख स्पष्ट करे केंद्र : दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करे, उसके बाद सरकार ने अपना 'सुविचारित रुख' तय करने और पेश करने के लिए समय मांग लिया।

नयी दिल्ली, 17 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करे, उसके बाद सरकार ने अपना 'सुविचारित रुख' तय करने और पेश करने के लिए समय मांग लिया।

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत ‘वैवाहिक बलात्कार अपवाद’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही खंडपीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति राजीव शकधर ने कहा कि केंद्र को ‘हां या नहीं’ में जवाब देना होगा, क्योंकि ऐसे मामलों में विचार-विमर्श कभी समाप्त नहीं होता है। पीठ में न्यायमूर्ति सी हरि शंकर भी शामिल थे।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस तरह के मामले में, उन्हें (केंद्र) सैद्धांतिक रूप से हां या ना कहना होगा, क्योंकि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो वे कितना भी विचार-विमर्श करें, यह समाप्त नहीं होने वाला है।’’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत के सामने ‘कम चर्चा और परामर्श’ वाला रुख रखना उचित नहीं होगा और परामर्श की प्रक्रिया शुरू करने के लिए समय की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति शकधर ने कहा, ‘‘मुझे इससे (परामर्श से) कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्हें निर्णय लेना होगा कि वे किस रास्ते पर जा रहे हैं... किन्हीं कारणों से मुझे लगता है कि कुछ मामले हैं, जिसमें अदालत अंततः कोई एक फैसला लेना होता है और तभी इसे हल किया जाता है। आप अपना समय लें।”

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘‘हमें अपना रुख तैयार करना होगा और आपके समक्ष सुविचारित रुख रखना होगा। इसके लिए थोड़े परामर्श आदि की आवश्यकता हो सकती है।”

पीठ ने कहा कि वह मामले में पेश होने वाले अन्य वकीलों को सुनना जारी रखेगी, जिससे केंद्र को समय मिलेगा। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से कहा, ‘‘आप वापस आइए। हम तय करेंगे कि आपको कितना समय देना है।”

पीठ एनजीओ आरआईटी फाउंडेशन, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन, एक पुरुष और एक महिला द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिसमें भारतीय कानून के तहत वैवाहिक बलात्कार के अपवाद को खत्म करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति हरि शंकर ने दोहराया कि एक विवाहित संबंध में संभोग की अपेक्षा होती है, जिसे कानूनी और सामाजिक रूप से मान्यता प्राप्त होती है।

न्याय मित्र के रूप में अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद को बनाए रखने का कोई कारण नहीं है।

मामले की सुनवाई 18 जनवरी को जारी रहेगी।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

हॉर्मुज पर बढ़ते तनाव के बीच बड़ी कूटनीतिक पहल, नरेंद्र मोदी और इमैनुएल मैक्रों ने सुरक्षित समुद्री रास्तों पर बनाई साझा रणनीति

MI vs PBKS, IPL 2026 24th Match Scorecard: वानखेड़े स्टेडियम में पंजाब किंग्स ने मुंबई इंडियंस को 7 विकेट से रौंदा, लगाया जीत का चौका; यहां देखें मैच का स्कोरकार्ड

GT vs KKR, IPL 2026 25th Match Date And Time: कब और कितने बजे से खेला जाएगा गुजरात टाइटंस बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच रोमांचक मुकाबला? इस स्टेडियम में भिड़ेंगी दोनों टीमें, यहां जानें वेन्यू समेत मैच से जुड़ी सभी जानकारी

GT vs KKR, IPL 2026 25th Match Stats And Preview: टूर्नामेंट के 25वें मुकाबले में कोलकाता नाइट राइडर्स को हराकर लय बरकरार रखना चाहेगी गुजरात टाइटंस, मैच से पहले जानें स्टैट्स एंड प्रीव्यू