देश की खबरें | केंद्र राज्यों से पैसा ले रहा पर कुछ दे नहीं रहा है: बजट पर विपक्षी दल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. द्रमुक और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अगुवाई वाले शिवसेना के गुट जैसे क्षेत्रीय दलों ने बुधवार को पेश किए बजट को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए केंद्र सरकार पर राज्यों के संसाधन लेने और उन्हें कुछ नहीं देने का आरोप लगाया। यही विचार वाम दलों ने भी साझा किए हैं।

नयी दिल्ली, एक फरवरी द्रमुक और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अगुवाई वाले शिवसेना के गुट जैसे क्षेत्रीय दलों ने बुधवार को पेश किए बजट को ‘निराशाजनक’ करार देते हुए केंद्र सरकार पर राज्यों के संसाधन लेने और उन्हें कुछ नहीं देने का आरोप लगाया। यही विचार वाम दलों ने भी साझा किए हैं।

द्रमुक नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने आरोप लगाया, "केंद्र राज्यों का सारा पैसा लेने की कोशिश कर रहा है और उन्हें कुछ नहीं दे रहा है।"

बीजू जनता दल (बीजद) नेता अमर पटनायक ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिस्से के रूप में राज्यों को कम आवंटन के परिणामस्वरूप उन्हें अपने प्राथमिक स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों को कोष देने के लिए संसाधनों की तलाश करनी होगी जिसमें कर्ज लेना भी शामिल हो सकता है।

हालांकि, उन्होंने बजट के कुछ पहलुओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसने देश के लिए स्पष्ट तौर पर हरित विकास पथ तैयार किया है और ऊर्जा परिवर्तन को भी स्पष्ट किया है। उन्होंने बजट के कर प्रावधानों के पक्ष में भी बात की।

राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट में पर्याप्त आवंटन नहीं करने का आरोप लगाया है।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की नेता चतुर्वेदी ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट ने कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों का पक्ष लेते हुए महाराष्ट्र को नजरअंदाज किया है।

चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘हम महाराष्ट्र के लिए कुछ घोषणाओं की उम्मीद कर रहे थे, जो सिर्फ एक राज्य नहीं बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। मुंबई देश की अर्थव्यवस्था का विकास इंजन है। मुंबई के लिए कोई आवंटन नहीं है। ’’

उन्होंने कहा कि राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) की प्रतिपूर्ति करते समय भी केंद्र भेदभाव करता है।

माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच रिश्ते और तनावपूर्ण होंगे और राजकोषीय संघवाद पर अब "गंभीर हमले" हो रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि राज्यों को जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में कर्ज जुटाने को कहा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कर्ज के लिए नई शर्तें थोप जा रही हैं।

येचुरी ने कहा, “ जीएसटी के बाद राज्य संसाधन नहीं जुटा सकते हैं। उन्हें नई शर्तों के तहत ऋण लेने की अनुमति नहीं है। तो आपने राज्यों को भीख का कटोरा लेकर केंद्र के पास आने तक सीमित कर दिया है।”

उन्होंने कहा, “ आपने अब कर्नाटक के लिए जो घोषणा की है वह उनके लिए एक बड़ा आवंटन है। साफ है कि जहां भाजपा सत्ता में है वहां राज्य सरकारों को फायदा मिलता है और गैर-भाजपा शासित राज्यों को दबाया जाता है।”

नेताओं ने ये टिप्प्णियां पीटीआई को दिए वीडियो साक्षात्कार के दौरान की। मारन ने बजट की आलोचना करते हुए कहा, “ बहुत उम्मीद थी कि वह पेट्रोलियम उत्पादों पर कर से राहत देगी, लेकिन सरकार ने इसकी घोषणा नहीं की। उन्होंने राज्यों के लिए बहुत सारी योजनाओं की घोषणा की लेकिन वे उनसे कह रहे है कि वे अपना ध्यान अपने आप रखें।’’

पटनायक ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट भाषण में सामाजिक क्षेत्र के अंतर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर खर्च का जिक्र नहीं किया गया।

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